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Pramod Murari

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जीरो टिलेज विधि से कैसे करें गेहूं की बुवाई

फसलों की खेती से पहले खेत की जुताई करना एक महत्वपूर्ण कार्य है। लेकिन इसमें समय एवं लागत अधिक आती है। ऐसे में इन दिनों टिलेज विधि से खेती का चलन बढ़ता जा रहा है। इस विधि से गेहूं की खेती करने पर खेत की जुताई की आवश्यकता नहीं होती है। जीरो टिलेज विधि से गेहूं की बुवाई की अधिक जानकारी के लिए इस वीडियो को ध्यान से देखें। यदि आपको इस वीडियो में दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे पोस्ट को लाइक करें एवं इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। कृषि संबंधी अधिक जानकारियों के लिए जुड़े रहें देहात से।

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Surendra Kumar Chaudhari

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बैंगन की सदाबहार किस्म से मिलेगी अधिक पैदावार

अब बिहार राज्य के किसान वर्ष बैंगन की खेती सफलतापूर्वक कर सकते हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा बैंगन की एक नई किस्म को विकसित की गई है। यह बैंगन की सदाबहार किस्म है। इस किस्म की खेती गर्मी एवं ठंड दोनों मौसम में की जा सकती है। आइए इस किस्म की विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

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Soumya Priyam

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केला : बीटिंग एंड ब्लास्ट रोग पर नियंत्रण के सटीक उपाय

बीटिंग एंड ब्लास्ट रोग एक फफूंद जनित रोग है। इस रोग के होने पर केले की परिपक्व पत्तियों, मिड्रिब, पेटीओल, पेडुनेकल एवं फल बुरी तरह प्रभावित होते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत के कुछ राज्यों में इस रोग का प्रकोप पहली बार नजर आ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में इस रोग के कारण केले की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। आइए इस विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

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Lohit Baisla

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27 October
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कैसे करें गेहूं की बुवाई?

कई बार किसानों के मन में यह सवाल आता है कि गेहूं की बुवाई सूखे में करनी चाहिए या पलेवा कर के करनी चाहिए। अगर आप भी जानना चाहते हैं इस सवाल का जवाब तो इस वीडियो को ध्यान से देखें। यदि आपको इस पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे पोस्ट को लाइक करें एवं इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। कृषि संबंधी अधिक जानकारियों के लिए जुड़े रहें देहात से।

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Pramod Murari

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27 October
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मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना : किसानों को मिलेगी आर्थिक मदद

किसानों की मदद के उद्देश्य से सरकार की तरफ से कई योजनाओं की शुरुआत की जा रही है। इन योजनाओं में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना भी शामिल है। इस योजना के तहत किसानों को हर वर्ष उनके खाते में राशि जमा की जाएगी। यह योजना की शुरुआत मध्यप्रदेश के किसानों को आर्थिक मदद के उद्देश्य से की गई है। आइए मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

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Surendra Kumar Chaudhari

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26 October
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गन्ना : इस विधि से करें बुवाई, होगा अधिक उत्पादन

शरदकालीन गन्ने की बुवाई के लिए अक्टूबर से नवम्बर तक का समय सबसे उपयुक्त है। बात करें बुवाई की तो गन्ने की बुवाई कई तरीकों से की जाती है। जिनमें रिंग पिट विधि, ट्रेंच विधि, आदि शामिल है। इस पोस्ट के माध्यम से हम रिंग पिट विधि से बुवाई की जानकारी प्राप्त करेंगे। इस विधि से गन्ने की बुवाई करने पर कम क्षेत्र से अधिक पैदावार प्राप्त किया जा सकता है। फलस्वरूप किसानों को कम लागत में अधिक मुनाफा होता है। आइए इस विधि से बुवाई की विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

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Soumya Priyam

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26 October
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चायपत्ती से कैसे तैयार करें प्रभावशाली उर्वरक?

चायपत्ती में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश की मात्रा पाई जाती है, जो पौधों के बेहतर विकास के लिए आवश्यक है। चायपत्ती से आसानी से पौधों के लिए प्रभावशाली उर्वरक तैयार किया जा सकता है। अगर आप भी जानना चाहते हैं चायपत्ती से उर्वरक तैयार करने की विधि एवं पौधों में इसे उपयोग करने के फायदे तो इस वीडियो को ध्यान से देखें। यदि आपको इस वीडियो में दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे पोस्ट को लाइक करें एवं इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। कृषि संबंधी अन्य रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारियों के लिए जुड़े रहें देहात से।

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Lohit Baisla

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26 October
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जीरा : बेहतर पैदावार के लिए करें इन किस्मों की खेती

मसालों में जीरे का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी खेती रबी मौसम में की जाती है। इसका उपयोग कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है। इसका पौधा सौंफ की तरह नजर आता है। भारत में जीरे के कुल उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत जीरे की खेती गुजरात एवं राजस्थान में की जाती है। जीरे की बेहतर पैदावार प्राप्त करने के लिए इसकी कुछ उन्नत किस्मों की जानकारी होना आवश्यक है। आइए इस विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

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Pramod Murari

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25 October
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नैक्ट्रिन : विदेशी फलों की बढ़ी मांग, ऐसे करें आपूर्ति

नैक्ट्रिन सेब की तरह नजर आने वाला एक विदेशी फल है। नैक्ट्रिन आडू एवं प्लम से तैयार किया गया है। यह फल बहुत स्वादिष्ट एवं रसीले होते हैं। इन दिनों विदेशी फलों की मांग बढ़ती जा रही है। नैक्ट्रिन के ताजे फलों से सेवन के साथ इसके फलों को सूखा कर एवं जैम, जेली, जूस बना कर भी उपयोग किया जाता है। आइए नैक्ट्रिन की खेती से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करें।

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Surendra Kumar Chaudhari

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25 October
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मिश्रित खेती : कम लागत में अधिक पैदावार

मिश्रित खेती के द्वारा किसान कम क्षेत्र में एक से अधिक फसलों की खेती कर के अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। मिश्रित खेती की अधिक जानकारी के लिए इस वीडियो को ध्यान से देखें। यदि आपको इस वीडियो में दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे पोस्ट को लाइक करें एवं इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। पशु पालन एवं कृषि संबंधी अन्य रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारियों के लिए जुड़े रहें देहात से।

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