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सब्जियों की फसल में फल मक्खी पर नियंत्रण का सबसे अचूक उपाय

लेखक : Surendra Kumar Chaudhari

एक फल मक्खी 40 फलों को प्रभावित कर सकती है। यह मक्खियां फलों के छिलकों में छेद कर के अंडे देती हैं। अंडों से 3 से 5 दिनों के बाद इल्लियां निकलती हैं। करीब 20 से 25 दिनों तक यह इल्लियां फलों को नुकसान पहुंचाने के बाद फलों से निकल कर भूमि पर गिरने लगती हैं। भूमि पर गिरने के बाद यह प्यूपा में बदल कर मिट्टी के अंदर चली जाती हैं। मिट्टी के अंदर जाने के करीब 1 सप्ताह बाद इल्लियां बाहर निकलती हैं और दोबारा अंडे देने के लिए तैयार हो जाती हैं। इससे आप फल मक्खियों के तेजी से बढ़ने का अंदाजा लगा सकते हैं। आइए फल मक्खियों पर अधिक जानकारी प्राप्त करते हुए हम इनके प्रकोप का लक्षण एवं नियंत्रण के तरीकों पर चर्चा करें।

फल मक्खी कैसे पहुंचाती हैं सब्जियों वाली फसलों को नुकसान?

  • फल मक्खी अंडे देने के लिए फलों में छेद करती हैं। फलस्वरूप प्रभावित फलों पर एक या इससे अधिक छेद नजर आने लगते हैं।

  • कीट की इल्लियां फलों को अंदर से खा कर नष्ट कर देती हैं।

  • प्रभावित फलों का आकार टेढ़ा हो जाता है।

  • प्रकोप बढ़ने पर फल सड़ने लगते हैं। ऐसे फलों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

  • कुछ इल्लियां फलों के साथ सब्जियों की बेल को भी खाती हैं, जिससे बेलों में गांठ बन जाते हैं।

कैसे करें फल मक्खी पर नियंत्रण?

  • सब्जियों के पौधों को लगाने से पहले खेत की गहरी जुताई करें। इससे मिट्टी में पहले से मौजूद प्यूपा नष्ट हो जाते हैं।

  • प्रति एकड़ भूमि में 6 से 8 फेरोमोन ट्रैप लगाएं। इसमें लगे गंधपाश (ल्योर) से नर कीट आकर्षित हो कर फंस जाते हैं। नर कीटों की संख्या कम होने पर मादा कीट अंडे नहीं दे पाती। इससे फल मक्खियों की वृद्धि पर रोक लगाई जा सकती है।

  • प्रभावित फलों को तोड़ कर नष्ट कर दें।

  • एक निश्चित अंतराल पर पौधों की जड़ों के आस-पास गुड़ाई करें। इससे मिट्टी में मौजूद कीट नाश हो जाएंगे।

  • प्रति लीटर पानी में 2 मिलीलीटर मैलाथियान मिला कर छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 8 से 10 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।

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हमें उम्मीद है इस पोस्ट में बताई गई दवाओं एवं अन्य उपायों को अपना कर आप सब्जियों वाली फसल को फल मक्खी के प्रकोप से बचा सकते हैं। यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अधिक से अधिक किसानों तक यह जानकारी पहुंच सके। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।

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22 April 2021

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