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पशुओं के लिए जानलेवा है दूध ज्वर रोग, जानें कारण एवं लक्षण

पशुओं के लिए जानलेवा है दूध ज्वर रोग, जानें कारण एवं लक्षण

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 28/3/2022

दूध ज्वर रोग पशुओं में होने वाले घातक रोगों में से एक है। दूध का ज्वर रोग पशुओं के रक्त में कैल्शियम की कमी के कारण होता है। बात करें ज्वर रोग के कारण की तो इस रोग को मुख्य रूप से 3 अवस्थाओं में बांटा गया है। आइए इस पोस्ट के माध्यम से हम दूध का ज्वर रोग की सभी अवस्थाओं के लक्षणों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

दूध ज्वर रोग की पहली अवस्था के लक्षण

  • पशुओं में संवेदनशीलता एवं उत्तेजना बढ़ने लगती है।

  • पशुओं में टेटनस जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं।

  • इस रोग से प्रभावित पशु अपने सिर को इधर-उधर हिलाने लगते हैं।

  • पशु अपने जीभ बाहर निकाल लेते हैं और अपने दांत भी किटकिटाने लगते हैं।

  • पशुओं का शारीरिक तापमान बढ़ जाता है।

  • पशुओं के शरीर एवं पिछले पैरों में अकड़न होने लगती है।

  • कभी-कभी आंशिक लकवा के कारण पशु गिर भी जाते हैं।

दूध ज्वर रोग की दूसरी अवस्था के लक्षण

  • पशुओं को खड़े होने में कठिनाई होती है।

  • वह अपने गले को पार्शव भाग की तरफ मोड़ कर बैठे रहते हैं।

  • पशुओं का शारीरिक तापनाम कम होने लगता है। जिससे उनका शरीर एवं पैर ठंडा हो जाता है।

  • आंखें सूख जाती हैं और पुतली फैल कर बड़ी हो जाती हैं।

  • पशु पलकें झपकाना बंद कर देते हैं।

  • प्रथम अमाशय की गति धीमी होने के कारण कब्ज की समस्या होने लगती है।

  • मांशपेशियों में ढिलाई होने लगती है।

  • पशुओं के हृदय की ध्वनि धीमी हो जाती है और हृदय की गति प्रति मिनट 60 तक बढ़ जाती है।

  • नाड़ी कमजोर हो जाती है।

  • पशुओं का रक्त चाप (ब्लड प्रेशर) कम हो जाता है।

दूध ज्वर रोग की तीसरी अवस्था के लक्षण

  • दूध ज्वर की तीसरी अवस्था में पशु ज्यादातर समय लेटे रहते हैं।

  • पशु बेहोशी की हालत में आजाते हैं।

  • पशुओं का शारीरिक तापमान कम हो जाता है।

  • हृदय की ध्वनि सुनाई नहीं देती है और हृदय की गति प्रति मिनट 120 तक बढ़ जाती है। लम्बे समय तक बैठे रहने के कारण पशु आफरा रोग की चपेट में आ सकते हैं।

दूध ज्वर ज्वर रोग का उपचार

  • दुग्ध ज्वर रोग होने पर पशुओं को जल्दी और आसानी से पचने वाले आहार का सेवन कराएं।

  • पशु चिकित्सक से परामर्श करना आवश्यक है।

  • पशु चिकित्सक की परामर्श के अनुसार ही पशुओं की देखभाल करें।

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