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मटर : बुवाई एवं उर्वरक प्रबंधन

लेखक : Lohit Baisla

मटर की दाल हो या सब्जी, नाम सुनते खाने के शौकीन लोगों के चेहरे खिल उठते हैं। ठंड के मौसम में हमारी पसंदीदा सब्जियों में शामिल मटर की मांग बढ़ने लगती है। इसकी बढ़ती मांग के कारण किसानों को इसकी खेती करने से बहुत मुनाफा होता है। अगर आप भी करना चाहते हैं मटर की खेती तो यहां से मटर की बुवाई के लिए उपयुक्त समय, बुवाई की विधि एवं उर्वरक की मात्रा की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

बुवाई का समय

  • मटर की अच्छी पैदावार के लिए इसकी बुवाई सितंबर-अक्टूबर महीने में करें।

  • ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी बुवाई मार्च से जून महीने में भी की जा सकती है।

बुवाई की विधि

  • इसकी बुवाई क्यारियों में की जाती है। सभी क्यारियों के बीच 45 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए।

  • पौधों से पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी रखें।

  • बीज की बुवाई अधिक गहराई में न करें। इसकी बुवाई 4 से 6 सेंटीमीटर की गहराई में करें।

  • मटर की बुवाई के लिए सीड ड्रिल का भी उपयोग कर सकते हैं।

उर्वरक प्रबंधन

  • प्रति एकड़ खेत में 4 से 5 टन गोबर की खाद मिलाएं।

  • इस बात का विशेष ध्यान रखें कि खेत में कच्ची गोबर का प्रयोग न करें। कच्ची गोबर में दीमक के पनपने का खतरा बना रहता है।

  • गोबर की खाद की जगह कम्पोस्ट खाद का भी प्रयोग कर सकते हैं।

  • प्रति एकड़ खेत में 20 किलोग्राम नाइट्रोजन एवं 25 किलोग्राम फास्फोरस मिलाएं।

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19 October 2020

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