Beej se bajar tak
 खोजें
 / 
 / 
मिर्च की फसल घुरचा रोग से हो न जाए नष्ट, बचाव अपनाएं यह उपाय

मिर्च की फसल घुरचा रोग से हो न जाए नष्ट, बचाव अपनाएं यह उपाय

लेखक - Dr. Pramod Murari | 25/7/2021

मिर्च की फसल में होने वाले घुरचा रोग को कुकड़ा रोग, पत्ती मरोड़ रोग, चुरड़ा-मुरड़ा रोग, बंधा रोग, लीफ कर्ल, आदि कई नामों से जाना जाता है। कई बार सही जानकारी नहीं होने के कारण यह रोग मिर्च की खेती करने वाले किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में आपकी इस समस्या को दूर करने के लिए हम मिर्च के पौधों में होने वाले घुरचा रोग के कारण, लक्षण एवं नियंत्रण के तरीकों पर जानकारी साझा कर रहे हैं। आइए इस विषय में विस्तार से चर्चा करें।

मिर्च के पौधों में होने वाले घुरचा रोग के कारण

  • वायरस इस रोग के होने का एक प्रमुख कारण है।

  • थ्रिप्स और माइटी जैसे रस चूसक कीटों के प्रकोप कारन भी यह रोग होता है।

  • बीज को उपचारित नहीं होने पर इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है।

  • इसके अलावा लंबे समय तक सूखा पड़ना, मॉनसून में देरी, नर्सरी में अधिक समय तक पैधे लगे रहने पर यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।

  • सफेद मक्खियां इस रोग को एक पौधे से दूसरे पौधों में फैलाने का काम करती हैं।

घुरचा रोग के कारण मिर्च के पौधों में होने वाले नुकसान

  • इस रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियां मुड़ने लगती हैं।

  • रोग बढ़ने पर पत्तियां एवं पत्तियों की शिराएं मोटी हो जाती हैं।

  • रोग से प्रभावित पौधे झाड़ियों की तरह नजर आने लगते हैं।

  • प्रभावित पौधों में फल कम आते हैं।

  • पौधों के विकास में बाधा आती है।

  • थ्रिप्स का प्रकोप होने पर पत्तियां ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं।

  • माइट के प्रकोप से पत्तियां नीचे की तरफ मुड़ने लगती हैं।

मिर्च के पौधों को घुरचा रोग से बचाने के तरीके

  • रोग को फैलने से रोकने के लिए प्रभावित पौधों को नष्ट कर दें।

  • मिर्च की खेती से पहले खेत की एक बार गहरी जुताई करें।

  • पौधों को इस रोग से बचाने के लिए 15 लीटर पानी में 8 मिलीलीटर कॉन्फीडोर (Confidor) एवं 8 ग्राम Ulala मिला कर छिड़काव करें।

  • इसके 3 दिन बाद 15 लीटर पानी में 5 ग्राम एजी वाइटल एवं देहात नैनो ब्लू मिला कर छिड़काव करें।

  • आवश्यकता के अनुसार 10 से 15 दिनों के अंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।

  • थ्रिप्स कारण घुरचा रोग होने पर प्रति लीटर पानी में 30 मिलीलीटर ट्राइजोफॉस 40 ई.सी मिलाकर छिड़काव करें।

  • माइट के कारण इस रोग के होने पर प्रति लीटर पानी में 40 मिलीलीटर प्रोपरजाईट 57 प्रतिशत मिलाकर छिड़काव करें।

  • सफेद मक्खियों का प्रकोप होने पर प्रति लीटर पानी में 5 मिलीलीटर नीम का तेल मिलाकर छिड़काव करें।

यह भी पढ़ें :

हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि आपको इस पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अधिक से अधिक किसानों तक यह जानकारी पहुंच सके। अगर आपकी मिर्च की फसल में भी दिख रहे हैं घुरचा रोग के लक्षण तो इस पोस्ट में बताए गए उपायों को अपनाएं। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।

33 लाइक और 10 कमेंट
यह भी पढ़ें -
संबंधित वीडियो -
मिर्च की फसल में जड़ गलन रोग

कृषि विशेषज्ञ से मुफ़्त सलाह के लिए हमें कॉल करें

farmer-advisory

COPYRIGHT © DeHaat 2022

Privacy Policy

Terms & Condition

Contact Us

Know Your Soil

Soil Testing & Health Card

Health & Growth

Yield Forecast

Farm Intelligence

AI, ML & Analytics

Solution For Farmers

Agri solutions

Agri Input

Seed, Nutrition, Protection

Advisory

Helpline and Support

Agri Financing

Credit & Insurance

Solution For Micro-Entrepreneur

Agri solutions

Agri Output

Harvest & Market Access

Solution For Institutional-Buyers

Agri solutions

Be Social With Us:
LinkedIn
Twitter
Facebook