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जैविक तरीके से करें खरपतवारों पर नियंत्रण

लेखक : Soumya Priyam

खेती में बढ़ती लागत एवं मिट्टी की घटती उर्वरक क्षमता को बढ़ाने के लिए जैविक खेती का प्रचलन बढ़ता जा रहा है। अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए जैविक खेती में खाद के तौर पर गोबर, गौमूत्र, नीम की खली, कंपोस्ट खाद, राख से बनी हुई खाद, शिवंश खाद, आदि का प्रयोग किया जाता है। केवल इतना ही नहीं जैविक विधि से बिना हानिकारक रसायनों का प्रयोग किए विभिन्न खरपतवारों को भी नष्ट किया जा सकता है। यहां से आप जैविक विधि से खरपतवारों पर नियंत्रण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करें। इससे खेत में पहले से मौजूद खरपतवार नष्ट हो जाएंगे।

  • आप चाहे तो बुवाई से पहले खेत में निकलने वाले खरपतवारों की जुताई कर उसे खेत में मिला सकते हैं। यह हरी खाद का काम करेगी। इससे खरपतवार नष्ट भी हो जाएंगे और मिट्टी में हरी खाद के प्रयोग से कई पोषक तत्वों की पूर्ति भी हो जाएगी।

  • फसलों को एक निश्चित दूरी पर ही लगाएं। अधिक दूरी होने पर खरपतवारों को निकलने के लिए अधिक जगह मिलती है।

  • सिंचाई के लिए खेत में तैयार की गई नालियों की नियमित सफाई करके खरपतवारों को निकलने से रोका जा सकता है।

  • जैविक विधि से खरपतवार पर नियंत्रण के लिए निराई गुड़ाई सबसे अच्छा तरीका है। कुछ समय के अंतराल पर खेत में 2 से 3 बार निराई गुड़ाई करें।

  • यांत्रिक विधि यानी खुरपी, पैडी वीडर, कोनोवीडर, आदि यंत्रों के द्वारा भी खरपतवारों पर नियंत्रण किया जा सकता है।

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हमें उम्मीद है इस पोस्ट में बताई गई जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। इस विधि से खरपतवारों पर नियंत्रण करके आप निश्चित ही बेहतर पैदावार प्राप्त कर सकेंगे। यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।

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29 January 2021

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