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हल्दी की फसल में ऐसे करें खरपतवार पर नियंत्रण एवं सिंचाई

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लेखक : Somnath Gharami

खरपतवार किसी भी फसल की पैदावार और उसकी गुणवत्ता को कम कर सकती है। खरपतवार हल्दी की फसल को भी बहुत नुकसान पहुंचाती है। खरपतवार पर नियंत्रण के लिए इस पोस्ट में दिए गए उपायों को अपना कर हल्दी की उपज बढ़ा सकते हैं।

खरपतवार पर नियंत्रण

  • हल्दी की फसल में निराई - गुड़ाई के द्वारा खरपतवारों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। आमतौर पर 3 से 4 बार निराई - गुड़ाई करनी चाहिए।

  • बुआई के लगभग 30 दिन बाद पहली निराई - गुड़ाई करें। बुआई के करीब 60 दिनों बाद दूसरी और 90 दिनों बाद तीसरी निराई - गुड़ाई करना आवश्यक है।

  • खेत में पलवार बिछा लें। इससे खरपतवार पर काफी हद तक नियंत्रण होता है।

  • प्रति एकड़ भूमि में करीब 600 ग्राम फ्लुक्लोरालिन के छिड़काव से हम चौड़ी पत्तियों वाले खरपतवारों पर पूरी तरह नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं।

सिंचाई की विधि

  • हल्दी की फसल में कुल 15 से 25 सिंचाई की आवश्यकता होती है।

  • हल्दी की फसल की सिंचाई खेत की मिट्टी और जलवायु पर निर्भर करती है। चिकनी दोमट या मटियार मिट्टी में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है।

  • वर्षा के मौसम में जरुरत होने पर करीब 10 से 20 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जा सकती है।

  • मिट्टी में नमी की कमी न होने दें। गर्मी के मौसम में 7 दिन के अंतराल पर और ठंड के मौसम में 15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।

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2 September 2020

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