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दिसंबर महीने के अंत में किए जाने वाले कृषि कार्य

दिसंबर महीने के अंत में विभिन्न फसलों की अच्छी पैदावार के लिए कई महत्वपूर्ण कार्य करने की आवश्यकता होती है। कुछ फसलों के लिए यह सिंचाई का समय है, वहीं कुछ फसलों के लिए खेत तैयारी करने के लिए उपयुक्त समय है। आइए जानते हैं विभिन्न फसलों पर की जाने वाली कृषि कार्यों के बारे में।
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गेहूं : समय पर बुवाई की गई फसलों में नाइट्रोजन का छिड़काव करें। हर 15 से 20 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।
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चना : चने की पैदावार बढ़ाने के लिए खुदाई करें। इससे पौधों में शाखाओं की मात्रा में वृद्धि होती है। चने की फसल को उकठा रोग से बचाने के लिए प्रति लीटर पानी में 1 मिलीलीटर टेबुकोनाजोले मिलाकर पौधों की जड़ों में डालें।
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बरसीम : अक्टूबर में बुवाई की गई बरसीम की पहली कटाई करें। जमीन की सतह से 5 से 7 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर कटाई करें। कटाई के तुरंत बाद सिंचाई करें।
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मिर्च : खरपतवार पर नियंत्रण के लिए निराई गुड़ाई करें। इसके बाद खेत में मल्चिंग करें।
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मेंथा : मेंथा की खेती के लिए खेत तैयार करें। इसके लिए प्रति एकड़ भूमि में 40 क्विंटल गोबर की खाद 16 से 20 किलोग्राम नाइट्रोजन 20 से 24 किलोग्राम फास्फोरस एवं 16 से 18 किलोग्राम पोटाश मिला कर जुताई करें। खेत तैयार करने के बाद बुवाई करें।
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लीची : लीची के बाग में सिंचाई का कार्य बंद कर दें। इस समय सिंचाई करने पर नए पत्ते निकलने लगते हैं और मंजर कमाते हैं। जिसका सीधा असर पैदावार पर होता है।
हमें उम्मीद है इस पोस्ट में बताई गई बातों पर अमल करके आप अच्छी फसल प्राप्त कर सकेंगे। यदि आपको यह जानकारी महत्वपूर्ण लगी है तो हमारी पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।
Pramod
Dehaat Expert
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25 December 2020
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