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तरबूज की कुछ उन्नत किस्में

Author : Dr. Pramod Murari

गर्मियों में तरबूज का सेवन बहुत लाभदायक होता है। इसमें करीब 97 प्रतिशत पानी की मात्रा होती है। इससे हमारे शरीर में ग्लूकोज की कमी पूरी होती है। पानी की अधिकता के कारण ही बाजारों में इसकी बहुत मांग रहती है। बढ़ती मांग के कारण किसान इसकी खेती पर विशेष ध्यान देते हैं। अगर आप भी कहना चाहते हैं तरबूज की खेती तो इस की उन्नत किस्मों की जानकारी यहां से प्राप्त करें।

  • पूसा बेदाना : इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के द्वारा विकसित किया गया है। इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके फलों में बीज नहीं होते हैं। इसके फल अधिक सुधार एवं मीठे होते हैं। गुदा का रंग गुलाबी होता है। इस किस्म के फलों को तैयार होने में 85 से 90 दिनों का समय लगता है।

  • डब्ल्यू 19 : यह किस्म अधिक तापमान को सहन कर सकता है। इसकी खेती शुष्क क्षेत्रों में भी की जा सकती है। इसके फलों पर हल्के हरे रंग की धारियां बनी होती है एवं इसका गुदा गहरे गुलाबी रंग का एवं खोज होता है। इसके फल उच्च गुणवत्ता के एवं मीठे होते हैं। फसल को तैयार होने में 75 से 80 दिनों का समय लगता है।

  • काशी पितांबर : इस प्रकार होते हैं। इसके छिलके पीले रंग के  एवं गुदा का रंग गुलाबी होता है। इसके प्रति फल का वजन औसतन 2.5 से 3.5 किलोग्राम होता है। प्रति एकड़ खेत से लगभग 160 से 180 क्विंटल फलों की प्राप्ति होती है।

  • अलका आकाश : यह संकर किस्मों में शामिल है। इसके फल अंडाकार एवं गुदा गुलाबी होता है। प्रति एकड़ भूमि से 36 से 40 टन फल प्राप्त किए जा सकते हैं।

  • दुर्गापुर मीठा : इसके फलों पर धारियां बनी होती है। यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है। इसकी प्रति फल का वजन 6 से 8 किलोग्राम होता है।

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आप अपनी पसंद के अनुसार इनमें से किसी भी किस्म का चयन करके तरबूज की अच्छी फसल प्राप्त कर सकते हैं। यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक करें साथ ही इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। तरबूज की खेती से जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।

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21 December 2020

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