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तेजी से सूख कर गिर रही हैं केले की पत्तियां, काले-पीले धब्बों ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें

तेजी से सूख कर गिर रही हैं केले की पत्तियां, काले-पीले धब्बों ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें

लेखक - Soumya Priyam | 14/9/2022

भारत में लगभग सभी केला उत्पादक क्षेत्रों में सिगाटोका रोग की समस्या देखने को मिलती है। यह पत्तियों पर लगने वाला  एक प्रकार का धब्बा नुमा रोग है, जो सामान्यतः फसल की पैदावार कम करने में एक मुख्य भूमिका निभाता है। फसल में रोग के प्रभाव से सर्वप्रथम पत्तियों की सूखने की समस्या आती है और देखते ही देखते सभी पत्तियां सूख कर झड़ जाती हैं।

क्या है सिगाटोका रोग?

सिगाटोका एक कवक जनित रोग है, जो माइकोस्फेरेला प्रजाती के फफूंद के कारण होता है। सिगाटोका आमतौर पर किसानों के बीच केले की प्रमुख पत्ती वाली बीमारी के रूप में जाना जाता है। रोग के प्रारंभिक लक्षण निचली पत्तियों पर दिखने प्रारंभ होते हैं और पत्तियों के किनारों पर हल्के पीले या गहरे भूरे रंग की धारियों द्वारा पहचाने जा सकते हैं। धीरे-धीरे ये धब्बे पूरी पत्तियों पर फैल जाते हैं और पत्तियों को झुलसा कर सुखा देते हैं।

पत्तियों को सुखा देने वाला यह रोग फसलों में दो प्रकार काले और पीले सिगाटोका के रूप में उपस्थित होता है। काला सिगाटोका स्यूडो सर्कोस्पोरा फिजिएंसिस कवक के कारण होता है, जिसे ब्लैक लीफ स्ट्रीक (बीएलएस) रोग के नाम से भी जाना जाता है। वहीं पीला सिगाटोका माइकोस्फेरेला म्यूजिकोला कवक से उत्पन्न एक बीमारी है, जो फसल में 11 से 80% तक की उपज हानि का कारण बन सकती है।

सिगाटोका रोग प्रबंधन

  • गंभीर रूप से प्रभावित केले की पत्तियों को काटकर हटा दें। संक्रमित पत्तियों को जलाकर पूर्णतः नष्ट कर दें या मिट्टी में अधिक गहराई पर दबा दें।

  • जल भराव की स्थिति में जल निकास की उचित व्यवस्था बनाए रखें।

  • खेत को खरपतवार मुक्त रखें।

  • मेटिराम 55% के साथ पाइराक्लोस्ट्रोबिन 5% WG की 450 ग्राम मात्रा का छिड़काव 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से करें।

  • पाइराक्लोस्ट्रोबिन 20% WG की 450 ग्राम मात्रा को 150 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़कें।

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केले में सिगाटोका रोग को खत्म करने के लिए शुरुआती रोकथाम के तरीके अपनाए जाने आवश्यक है। बीमारी से जुड़ी अन्य जानकारी व इसके रोकथाम की उचित सलाह के लिए आप देहात टोल फ्री नंबर 1800 1036 110 पर कॉल कर कृषि विशेषज्ञों से जुड़ सकते हैं।

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