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सत्यानाशी घास में है कमाल के गुण

सत्यानाशी घास में है कमाल के गुण

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 18/12/2020

सत्यानाशी नाम सुनते ही हम सोचने लगते हैं कि जिस पौधे का नाम ही ऐसा हो उसमें भला कौन से गुण होंगे? लेकिन अपने नाम की विपरीत इस पौधे में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। आज हम इसमें मौजूद कुछ कमाल के गुणों की जानकारी देंगे। इस पौधे के पत्ते, जड़, यहां तक इससे निकलने वाला पीला दूध भी बहुत लाभदायक होता है। इन गुणों के कारण इस पौधे को स्वर्णक्षीणी भी कहा जाता है। कुछ इस प्रकार यह हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक सिद्ध होता है :

  • सत्यानाशी पौधों के पत्तों के रस एवं पौधों से निकलने वाले दूध में कई कीटाणु नाशक एवं विषाणु नाशक तत्व होते हैं। इसके रस को लगाने से किसी भी प्रकार के घाव ठीक हो जाते हैं।

  • आयुर्वेद में इसका प्रयोग कुष्ठ रोग के उपचार के लिए किया जाता है।

  • एंटीबैक्टीरियल गुण होने के कारण इसके दूध से एग्जिमा, खुजली, फोड़े, त्वचा का संक्रमण, त्वचा का अल्सर आदि का इलाज किया जाता है।

  • इस पौधों की पत्तियों को पीसकर उसका रस फोड़े या घाव के ऊपर लगाने से वह जल्दी ठीक होता है। आप चाहें तो पत्तियों का पेस्ट भी उपयोग कर सकते हैं।

  • यह किसी भी प्रकार के आंखों के रोग को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है। इसके दूध को गुलाब जल या घी में मिलाकर काजल की तरह लगाने से आंखों का सूखापन, ग्लूकोमा, आंखों की लालिमा, सूजन, रतौंधी, आदि कई रोग ठीक हो सकते हैं।

  • पेट दर्द को दूर करने में भी सत्यानाशी पौधे बहुत प्रभावी होते हैं। 10 ग्राम घी में 3 से 5 मिलीलीटर सत्यानाशी पौधे का दूध मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द से राहत मिलती है।

  • दाद होने पर इसकी ताजा पत्तियों को उबालकर उस पानी से प्रभावित क्षेत्रों को धोने से दाद जल्दी ठीक होता है।

  • इसके अलावा इसका उपयोग गुर्दे का दर्द, मलेरिया, मुंह के छाले, जोड़ों का दर्द, सफेद दाग, नाक-कान से खून आना, पीलिया रोग, मोतियाबिंद, आदि कई रोगों को ठीक करने में किया जाता है।

  • इससे मच्छरों को भी दूर भगाया जा सकता है।

नोट :

  • सत्यानाशी पौधों के बीज अत्यधिक विषैले होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग केवल शरीर के बाहरी अंगों पर ही करना चाहिए। बीज के सेवन से व्यक्ति की मृत्यु तक हो सकती है। इसलिए इसका प्रयोग करते समय विशेष सावधानी की आवश्यकता है।

  • अधिक लाभ के लिए सत्यानाशी पौधों का प्रयोग चिकित्सक के परामर्श के अनुसार करें।

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