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सर्पगंधा : खरपतवार एवं रोगों पर नियंत्रण के तरीके

सर्पगंधा : खरपतवार एवं रोगों पर नियंत्रण के तरीके

लेखक - Dr. Pramod Murari | 9/5/2022

सर्पगंधा एक सुगंधित जड़ वाली औषधी है, जो घाव, बुखार, पेट का दर्द, अनिद्रा, उच्च रक्तचाप, मिर्गी और दिमाग के रोगों, आदि में लाभकारी सिद्ध हुई है। सर्पगंधा के पौधों की ऊंचाई 1.5 मीटर तक हो सकती है, साथ ही पत्तों की लम्बाई 8 से 15 सेंटीमीटर तक होती है। सर्पगंधा की खेती से प्रति एकड़ में 30 किलोग्राम तक बीज प्राप्त किया जा सकता है, जो बाजार में लगभग 3 हजार से 4 हजार प्रति किलोग्राम की कीमत पर बेचा जाता है। बाजार में अच्छी कीमत और कई प्रकार की दवाओं में प्रयोग होने के कारण सर्पगंधा की खेती किसानों के लिए लाभकारी होती है। लेकिन कई प्रकार के खरपतवार और रोगों के प्रकोप नुकसान का एक बड़ा कारण बनते हैं। खरपतवारों का प्रकोप फसल के शुरुआती दौर में अधिक देखने को मिलता है। यह खेत में पूरी तरह से फैलकर फसल को पूरी तरह से ढक लेते हैं जिससे पौधे छोटी अवस्था में ही मर जाते हैं। फसल की बेहतर पैदावार और अधिक मुनाफे के लिए खरपतवारों और रोगों को नियंत्रण करना आवश्यक है। इससे जुड़ी अधिक जानकारी के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।

सर्पगंधा में खरपतवार नियंत्रण

  • पौधों की रोपाई के 15 से 20 दिनों के भीतर निराई-गुड़ाई करें।

  • शुरुआती समय में फूलों के लगने पर जड़ों का विकास नहीं हो पाता है। इसलिए इन्हें जड़ों से काट दें।

  • वर्षा के मौसम में 2 से 3 बार खेत की निराई-गुड़ाई करें।

  • अन्य मौसम में आवश्कतानुसार निराई-गुड़ाई करें।

सर्पगंधा में लगने वाले कुछ प्रमुख रोगों पर नियंत्रण

  • पत्तों पर धब्बा रोग : इस बीमारी से पत्तों की ऊपरी और निचली सतह पर भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। पत्ता पहले पीले रंग का हो जाता है फिर सूख कर गिर जाता है। इसकी रोकथाम के लिए 400 ग्राम डाइथेन एम-45 को 150 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

  • जड़ गलन : यह रोग मैलोएडोगाइन इनकोगनीटा और मैलोएडोगाइन हाप्ला के कारण होता है। इस रोग के कारण जड़ें गलने लगती हैं और पौधों एवं पत्तियों के विकास में कमी आती है। इस पर नियंत्रण के लिए 3 जी कार्बोफिउरॉन 10 किलोग्राम या 10 जी फोरेट ग्रैनुलस 5 किलोग्राम प्रति एकड़ में डालें।

  • गहरे भूरे धब्बे : इस रोग के कारण पत्तों पर भूरे धब्बे पड़ने लगते हैं। इससे बचाव के लिए प्रति एकड़ खेत में 30 ग्राम ब्लीटॉक्स को 10 लीटर पानी के साथ मिलाकर स्प्रे करें।

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