बारिश के मौसम में फसलों में खरपतवार होने की समस्या बढ़ जाती है। इसके कारण उत्पादन में 30 से 70 प्रतिशत तक कमी आती है। इस पोस्ट के द्वारा आप खरपतवार पर नियंत्रण के साथ सिंचाई की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
खरपतवार पर नियंत्रण
सोयाबीन की बुआई के बाद 30 से 40 दिनों तक खरपतवार पर नियंत्रण बहुत जरूरी है।
अंकुरण होने के 40 से 45 दिन बाद निराई-गुड़ाई कर के खतपतवार को नष्ट कर देना चाहिए।
15-20 दिन के पौधों में घास को नष्ट करने के लिए प्रति हेक्टेयर जमीन में 1 लीटर क्यूजेलेफोप इथाइल का छिड़काव करें।
चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नष्ट करने के लिए प्रति हेक्टेयर भूमि में 750 मिलीलीटर इमेजेथाफायर का छिड़काव करें।
बिजाई के 2-3 दिन बाद प्रति एकड़ जमीन में 100-200 लीटर पानी में 800 मिलीलीटर पैंडीमैथालीन मिला कर छिड़काव करने से नदीनों को रोका जा सकता है।
प्रति हेक्टेयर खेत में 1.65 से 2.2 लीटर बासालिन को 800 से 1000 लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करने से भी खरपतवार की रोकथाम की जा सकती है।
सिंचाई
सोयाबीन की फसल अच्छी बारिश होने पर सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।
सोयाबीन की फसल में कुल 2 से 3 बार सिंचाई करनी चाहिए।
फली बनने के समय सिंचाई करना बहुत जरूरी है। इस समय पानी की कमी से फसल की पैदावार प्रभावित होती है।
खेत में अगर नमी की मात्रा में कमी हो तो 1-2 बार हलकी सिंचाई करें।
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