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शुष्क कृषि तकनीक से पाएं कम पानी में भी बेहतर उत्पादन

Author : Lohit Baisla

शुष्क कृषि तकनीक

  • कम बारिश और सिंचाई की समस्या से निजात पाने के लिए शुष्क कृषि तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

  • यह तकनीक बारिश के पानी और जैविक खादों के उन्नत प्रयोग के आधार पर विकसित की गयी है।

  • शुष्क कृषि तकनीक उन क्षेत्रों में प्रयोग की जाती है, जहां वार्षिक वर्षा 50 सें.मी. या उससे कम होती है।

शुष्क भूमि की समस्याएं

  • नमी की कमी एवं अनिश्चित वर्षा

  • सीमित फसलों का चयन

  • उपज की गुणवत्ता और उत्पादकता में कमी

  • वर्षा पर पूर्ण रूप से निर्भरता

शुष्क कृषि तकनीक के मुख्य पहलू

  • मिट्टी में नमी संरक्षण के समय पर ही खेत की तैयारी या बीज बोने जैसे कार्य करें।

  • खेत में गहरी जुताई, स्टबल मल्चिंग का प्रयोग करें।

  • पानी के संरक्षण के लिए वाटर शेड का उपयोग करें।

  • पानी की कम खपत के लिए ड्रिप सिंचाई विधि का प्रयोग करें।

  • फसल के बेहतर उत्पादन के लिए फसल चक्र अपनाएं।

  • मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक उर्वरकों का प्रयोग करें।

  • खेत में खरपतवार न उगने दें यह मिट्टी में पानी और पोषण को सोख लेते हैं।

  • फसल योजना बनाएं और सीमित मिट्टी की नमी की स्थिति के अनुरूप फसल का चयन करें।

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शुष्क कृषि तकनीक  से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आप हमें अपने सवाल कमेंट बॉक्स में लिखकर पूछ सकते हैं।

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26 July 2022

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