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सब्जियों की खेती : उत्पादन एवं प्रबंधन

सब्जियों की खेती : उत्पादन एवं प्रबंधन

लेखक - Lohit Baisla | 14/5/2021

हमारे दैनिक आहार में सब्जियों का एक विशेष स्थान है। सब्जियां स्वादिष्ट होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर होती है। पारंपरिक फसलों की जगह किसान सब्जियों की खेती पर अधिक ध्यान दे  रहे हैं। अधिक मुनाफे के लिए एक साथ कई सब्जियों की खेती की जा सकती है। गेहूं, धान, मक्का, आदि फसलों की तुलना में सब्जियां जल्दी तैयार भी हो जाती हैं। आइए सब्जियों के उत्पादन एवं प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

सब्जियों की फसल को मुख्यतः चार भागों में बांटा जा सकता है। बेल वाली सब्जियां, छोटे पौधों वाली सब्जियां, पत्तेदार सब्जियां एवं भूमिगत सब्जियां।

  • बेल वाली सब्जियां : इसमें लौकी, तोरई, कद्दू, करेला, परवल, कुंदरु, खीरा, ककड़ी, आदि शामिल है। इनकी बुवाई मार्च से मई महीने में की जाती है। इन सब्जियों की बेल भूमि पर फैलते हुए वृद्धि करती है। अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए इन पौधों को सहारा देना आवश्यक है। पौधों को सहारा देने से सब्जियां जमीन की सतह से सटती नहीं हैं। परिणाम स्वरूप भूमिगत कीट एवं रोगों का प्रकोप भी कम होता है। खेत में या किसी लकड़ी के सहारे बेलों को सहारा दिया जा सकता है।

  • छोटे पौधों वाली सब्जियां : इसमें बैंगन, टमाटर, भिंडी, गोभी, मिर्च, पत्ता गोभी, आदि शामिल है। इन सब्जियों में फल छेदक कीट का प्रकोप सबसे अधिक होता है। सब्जियों को फल छेदक कीट से बचाने के लिए 15 लीटर पानी में 5 से 10 मिलीलीटर देहात कटर मिलाकर छिड़काव करें। सब्जियों के छोटे पौधों में आर्द्र रोग की समस्या भी होती है। इस रोग से पौधों को बचाने के लिए बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 3 ग्राम कार्बेंडाजिम से उपचारित करें। इसके साथ ही विभिन्न रोग एवं कीटों से प्रभावित फल एवं पौधों के प्रभावित भाग को खेत से बाहर निकाल कर नष्ट कर दें।

  • पत्तेदार सब्जियां : इनमें पालक, चौलाई, धनिया, पुदीना, आदि शामिल है। इन सब्जियों के बीज छोटे होते हैं, इसलिए बुवाई से पहले खेत की मिट्टी को भुरभुरी बना लें। भुरभुरी मिट्टी में बीज का जमाव अच्छी तरह होता है। कई बार किसान छिटकाव विधि से इन सब्जियों की बुवाई करते हैं। छिटकाव विधि से बुवाई करने पर अधिक मात्रा में बीज की आवश्यकता होती है, साथ ही सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण में भी कठिनाई होती है। इन समस्याओं से बचने के लिए खेत में क्यारियां तैयार कर के बीज की बुवाई करें।

  • भूमिगत सब्जियां : इनमें आलू, प्याज, लहसुन, मूली, गाजर, चुकंदर, आदि शामिल है। इन सब्जियों की खेती करने से पहले खेत की एक बार गहरी जुताई अवश्य करें। इससे खेत की मिट्टी भुरभुरी हो जाएगी। भुरभुरी मिट्टी में जड़ों का फैलाव एवं कंद का विकास अच्छी तरह होता है। भूमिगत सब्जियों के कंद के आकार में वृद्धि के लिए बोरान का प्रयोग करें।

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