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रतनजोत : खेती से पहले रखें जानें यह महत्वपूर्ण बातें

Author : Soumya Priyam

रतनजोत को कई क्षेत्रों में जैट्रोफा, चन्द्रजोत, जंगली अरंड, व्याध्र अरंड एवं  जमालगोटा के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती पर्यावरण के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इसका उपयोग मुख्यतः जैविक ईंधन एवं जैविक खाद के निर्माण में किया जाता है। इसके अलावा रतनजोत का आयुर्वेद में भी बहुत महत्व है। आइए रतनजोत की खेती पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

रतनजोत की खेती के फायदे

  • यह उच्च गुणवत्ता के बायो-डीजल का एक बेहतर स्रोत है।

  • यह मिट्टी के कटाव को रोकने में सहायक है।

  • खेत की मेड़ों पर बाड़ के तौर पर इसकी खेती की जा सकती है।

  • इससे कम धुएं वाला डीजल तैयार किया जा सकता है।

  • रंग बनाने में भी इसका प्रयोग किया जाता है।

  • बाजार में कम कीमत में इसके बीज उपलब्ध हैं।

रतनजोत की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी एवं जलवायु

  • इसकी खेती गर्म रेतीली, पथरीली एवं बंजर भूमि में की जाती है।

  • इसके अलावा दोमट मिट्टी में खेती करने पर भी भरपूर पैदावार प्राप्त किया जा सकता है।

  • जल जमाव वाले क्षेत्रों में इसकी खेती नहीं करनी चाहिए।

  • पौधों के उचित विकास के लिए समशीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है।

बीज की मात्रा एवं बीज उपचारित करने की विधि

  • प्रति एकड़ भूमि में खेती करने के लिए 2 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

  • बीज के बेहतर जमाव के लिए एवं पौधों को कई घातक रोगों एवं कीटों से बचाने के लिए बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम थीरम या बाविस्टिन से उपचारित करें।

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20 December 2021

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