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रेबीज रोग बन सकता है पशुओं के मृत्यु का कारण, बचाव के लिए अपनाएं यह तरीका

रेबीज रोग बन सकता है पशुओं के मृत्यु का कारण, बचाव के लिए अपनाएं यह तरीका

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 22/11/2022

क्या आप जानते हैं कि रेबीज रोग हमारे पालतू पशुओं के लिए मृत्यु का कारण बन सकता है? यह एक विषाणु जनित रोग है, जो कुत्ते, बिल्ली, बंदर, गीदड़, लोमड़ी या नेवले के काटने से होता है। रेबीज रोग से संक्रमित पशुओं के काटने पर इस रोग के विषाणु स्वस्थ पशुओं के शरीर में प्रवेश करते हैं और उनके तंत्र को प्रभावित करते हुए मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। उचित इलाज नहीं मिलने पर पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है। केवल इतना ही नहीं, गाय, भैंस, भेड़, बकरी, घोड़े, ऊंट, आदि पशुओं के अलावा यह रोग मनुष्यों के लिए भी बहुत घातक है। आपको शायद यह जानकर हैरानी होगी की दुधारू पशुओं में रेबीज रोग होने पर रोग के विषाणु दूध में आ सकते हैं। इसलिए प्रभावित पशुओं के दूध का सेवन न करें।

क्या है पशुओं में रेबीज रोग के लक्षण?

  • रेबीज रोग से प्रभावित पशुओं को पानी से डर लगता है। जिससे वे पानी से दूर भागने लगते हैं।

  • पशु अपना सिर किसी पेड़ या दीवार पर मारने लगते हैं।

  • पशुओं के मुंह से लार गिरने लगता है।

  • कुछ समय बाद पशुओं की पिछली टांगे कमजोर हो जाती हैं।

  • उग्रता, पागलपन या लकवा के लक्षण नजर आने लगते हैं।

पशुओं को रेबीज रोग से कैसे बचाएं?

  • पशुओं को इस रोग से बचाने के लिए एंटी रेबीज का टीका लगवाएं।

  • गाय, भैंस एवं नवजात पशुओं को आवारा कुत्ते एवं बिल्लियों से दूर रखें।

  • अपने पालतू कुत्ते, बिल्ली को नियमित अंतराल पर रेबीज का टीका लगवाएं।

रेबीज रोग प्रभावित जानवरों के काटने पर क्या करें?

  • कुत्ते, नेवले, बिल्ली, आदि जानवरों के काटने पर तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।

  • कुत्ते, बिल्ली, नेवले, लोमड़ी, आदि के काटने पर काटे गए स्थान को साफ पानी से 15 से 20 मिनट तक धोएं।

  • इसके बाद घाव की साबुन से सफाई करें।

  • पानी सूखने के बाद काटे हुए स्थान पर एंटीसेप्टिक दवा लगाएं।

  • रेबीज रोग से प्रभावित पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखें।

  • संक्रमित पशुओं के खाने पीने की अलग व्यवस्था करें।

  • प्रभावित पशुओं के दूध का सेवन न करें।

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पशुओं को होने वाले रोग एवं उनके बेहतर स्वास्थ्य से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप हमारे टोल फ्री नंबर 1800-1036-110 पर संपर्क कर के पशु चिकित्सकों से परामर्श कर सकते हैं। पशुपालन संबंधित अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। इस जानकारी को अन्य पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

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