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पशुओं के लिए जानलेवा है गलघोंटू रोग, जाने के लक्षण एवं बचाव के तरीके

पशुओं के लिए जानलेवा है गलघोंटू रोग, जाने के लक्षण एवं बचाव के तरीके

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 15/7/2021

इंसानों की तरह पशुओं को भी कई जानलेवा रोग होते हैं। जिनमे से एक है गलघोंटू रोग। किसी भी आयु के पशु इस रोग की चपेट में आ सकते हैं। सही समय पर इलाज नहीं करने पर पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है। इस रोग के होने पर पशुओं की मृत्यु दर 70 से 100 प्रतिशत है। यह रोग किसी भी मौसम में हो सकता है। लेकिन वर्षा के मौसम में इस रोग के होने की संभावना अधिक होती है। यदि आप भी पशु पालन व्यवसाय से जुड़े हैं तो पशुओं को होने वाले इस घातक रोग की जानकारी होना बहुत जरूरी है। आइए इस पोस्ट के माध्यम से हम गलघोंटू रोग के लक्षण एवं बचाव के तरीकों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

गलघोंटू रोग का लक्षण

  • पशुओं का सुस्त एवं बेचैन रहना।

  • पशुओं को 106 से 108 डिग्री फारॅनेहाइट तक तेज बुखार होना।

  • इस रोग के होने पर पशुओं को भूख कम लगती है।

  • पशु जुगाली करना कम कर देते हैं।

  • पशुओं के मुंह से लार टपकने लगता है।

  • प्रभावित पशुओं की आंखें लाल हो जाती हैं।

  • सांस में घरघराहट शुरू हो जाती है।

  • पशु जीभ बाहर निकालकर सांस लेने लगते हैं।

  • पशुओं के सिर एवं गर्दन में दर्दयुक्त सूजन होती है।

गलघोंटू रोग से बचाव के तरीके

  • गंभीर रोग से बचाने के लिए पशु आवास की नियमित सफाई करें।

  • वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले टीकाकरण कराएं।

  • 6 माह के ऊपर की आयु के सभी पशुओं को ए.एस.आईल एड्‌ज्यूवेट वैक्सीन लगवाएं।

गलघोंटू रोग होने पर क्या करें?

  • रोग से ग्रसित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।

  • प्रभावित पशुओं के खाने-पाने की अलग व्यवस्था करें।

  • धुंआ होने पर पशुओं को सांस लेने में कठिनाई होती है। इसलिए पशु आवास के आस-पास धुंआ न करें।

  • सूजन कम करने के लिए गर्म बालू की पोटली बनाकर सूजन वाले भाग पर सिंकाई करें।

  • आवश्यकता होने पर तुरंत पशु चिकित्सक से परामर्श करें।

  • पशु चिकित्सक की परामर्श के अनुसार पशुओं को दवाएं देनी चाहिए।

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