Beej se bajar tak
 खोजें
 / 
 / 
पशुओं में दूध ज्वर रोग के कारण, लक्षण एवं बचाव के उपाय

पशुओं में दूध ज्वर रोग के कारण, लक्षण एवं बचाव के उपाय

लेखक - Dr. Pramod Murari | 22/7/2021

दूध ज्वर रोग को मिल्क फीवर एवं दुग्ध बुखार के नाम से भी जाना जाता है। पशुओं के लिए यह रोग बहुत घातक सिद्ध होता है। गाय, भैंस में प्रसव के 2 से 3 दिनों के अंदर इस रोग के होने का खतरा अधिक होता है। गाय, भैंस के अलावा भेड़ एवं बकरियों में भी इस रोग के होने का खतरा बना रहता है। समय रहते यदि पशुओं का इलाज नहीं किया गया तो पशुओं की मांशपेशियों में लकवा भी हो सकता है। आइए पशुओं में होने वाले इस घातक रोग के कारण, लक्षण एवं बचाव के तरीकों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

पशुओं में दूध ज्वर रोग के कारण

  • यह रोग रक्त में कैल्शियम की कमी के कारण होता है।

  • कोलस्ट्रम में रक्त से 12-13 गुना अधिक कैल्शियम होता है। प्रसव के बाद कोलेस्ट्रम के साथ अधिक मात्रा में कैल्शियम शरीर से बाहर आ जाता है।

  • प्रसव के बाद अचानक कोलेस्ट्रम निकल जाने के बाद हड्डियों से शरीर को तुरंत कैल्शियम नहीं मिल पाता है।

  • प्रसव के बाद पशुओं को संतुलित आहार नहीं मिलने के कारण भी यह रोग होता है।

  • पशुओं के आहार की मात्रा एवं गुणवत्ता में अचानक कमी आने से भी इस रोग के लक्षण नजर आने लगते हैं।

दूध ज्वर रोग की अवस्थाएं

पशुओं में दूध ज्वर रोग 3 अवस्थाओं में होता है।

दूध ज्वर रोग की पहली अवस्था

  • इस अवस्था में पशुएं प्रसव से पहले उत्तेजित हो जाती हैं।

  • पशुओं में अधिक संवेदनशीलता, उत्तेजना एवं टेटनस के लक्षण नजर आते हैं।

  • पशु आहार ग्रहण करना बंद कर देते हैं।

  • पहली अवस्था में पशु अपने जीभ को बाहर निकाले रहते हैं।

  • पशुओं की दांतें किटकिटाने लगती हैं।

  • प्रभावित पशुओं का शारीरिक तापमान समान्य से थोड़ा अधिक हो जाता है।

  • पशुओं के शरीर एवं पिछले पैरों में अकड़न की समस्या शुरू हो जाती है।

  • आशिंक लकवा के कारण पशु गिरने लगते हैं।

दूध ज्वर रोग की दूसरी अवस्था

  • दूसरी अवस्था में पशु गर्दन मोड़कर बैठे रहते हैं।

  • पशुओं को उठने एवं खड़े रहने में कठिनाई होती है।

  • पशुओं का शारीरिक तापमान सामान्य से कम हो जाता है।

  • रोग से प्रभावित पशुओं के पैर एवं शरीर ठंडे हो जाते हैं।

  • आंखों की पुतली फैल जाती है और आंखों में सूजन हो जाती है।

  • पशु पलकें झपकना बंद कर देते हैं।

  • इस अवस्था में अमाशय की गति धीमी होने से कब्ज की समस्या शुरू हो जाती है।

  • पशुओं की मांसपेशियों में ढिलाई पड़ने लगती है।

  • पशुओं के हृदय की ध्वनि धीमी हो जाती है और हृदय बढ़ कर गति प्रति मिनट 60 तक हो सकती है।

  • पशुओं का रक्तचाप कम हो जाता है।

दूध ज्वर रोग की तीसरी अवस्था

  • तीसरी अवस्था में पशु ज्यादातर समय फर्श पर लेटे रहते हैं।

  • पशु बेहोशी की हालत में आ जाते हैं।

  • पशुओं का शारीरिक तापमान कम हो जाता है।

  • इस अवस्था में पशुओं की हृदय गति प्रति मिनट 120 तक बढ़ जाती है।

  • पशुओं के हृदय की ध्वनि सुनाई नहीं देती है।

  • तृतीय अवस्था में पशुओं की माशपेशियों में लकवा हो जाता है।

  • अधिक समय तक बैठे रहने के कारण पशुओं में आफरा रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।

पशुओं को दूध ज्वर रोग से बचाने के उपाय

  • प्रसव से 3 महीना पहले से पशुओं के आहार में अधिक कैल्शियम एवं फास्फोरस शामिल करें।

  • पशुओं के आहार में सूखी घास एवं चारा भी शामिल करें।

  • प्रसव के बाद पशुओं को संतुलित आहार का सेवन कराएं।

  • इस रोग के लक्षण नजर आने पर तुरंत पशु चिकित्सक से परामर्श करें।

यह भी पढ़ें :

हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि आपको इस पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों और पशु पालकों के साथ साझा भी करें। जिससे अधिक से अधिक किसान एवं पशुपालक इस जानकारी का लाभ उठाते हुए पशुओं को इस घातक रोग से बचा सकें। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।

9 लाइक और 0 कमेंट
यह भी पढ़ें -
संबंधित वीडियो -
वर्षा के मौसम में पशुओं की देखभाल

कृषि विशेषज्ञ से मुफ़्त सलाह के लिए हमें कॉल करें

farmer-advisory

COPYRIGHT © DeHaat 2022

Privacy Policy

Terms & Condition

Contact Us

Know Your Soil

Soil Testing & Health Card

Health & Growth

Yield Forecast

Farm Intelligence

AI, ML & Analytics

Solution For Farmers

Agri solutions

Agri Input

Seed, Nutrition, Protection

Advisory

Helpline and Support

Agri Financing

Credit & Insurance

Solution For Micro-Entrepreneur

Agri solutions

Agri Output

Harvest & Market Access

Solution For Institutional-Buyers

Agri solutions

Be Social With Us:
LinkedIn
Twitter
Facebook