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फूल गोभी की खेती की पूरी जानकारी

फूल गोभी की खेती की पूरी जानकारी

लेखक - Dr. Pramod Murari | 5/5/2020

फूल गोभी का इस्तेमाल सब्जी के अलावा पकौड़े और सूप बनाने में किया जाता है। वैसे तो इसकी खेती पूरे साल की जा सकती है। गोभी की अधिकांश प्रजातियों के लिए ठंडी और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है। इसलिए आमतौर पर पछेती किस्मों की खेती सितंबर से अक्टूबर महीने में की जाती है। अगेती किस्मों की खेती के लिए जून - जुलाई का महीना सही होता है। गोभी की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी, बुआई, सिंचाई आदि की जानकारी यहां से प्राप्त करें।

  • अच्छे जल निकास वाली बलुई दोमट मिट्टी में फूल गोभी की खेती करने से अच्छी पैदावार होती है।

  • खेत तैयार करते समय सबसे पहले मिट्टी पलटने वाली हल से 2 बार जुताई करें। इसके बाद आप 2 बार कल्टीवेटर चला कर जुताई करें।

  • प्रत्येक जुताई के बाद हल्की सिंचाई कर लें इससे भूमि में नमी की मात्रा संतुलित रहेगी। खेतों में जल जमाव न हो इस बात का विशेष ध्यान रखें।

  • पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद या गोबर खाद डाल कर भी आप खेत तैयार कर सकते हैं।

  • इसकी खेती के लिए 15 से 18 डिग्री तापमान सर्वोत्तम है। अधिक तापमान में फूलों के आकर पर विपरीत असर होता है।

  • प्रति हेक्टेयर भूमि में करीब 600 से 700 ग्राम बीजों की आवश्यकता होती है। गोभी की खेती बीजों के द्वारा नहीं की जाती है। खेत में लगाने से पहले पौधों को नर्सरी में तैयार किया जाता है।

  • पौधों को मेड़ पर लगाया जाता है। खेत में लगभग 1 से 2 फीट की दूरी पर मेड़ बना लें।

  • खेत में पौधों की रोपाई शाम के समय करनी चाहिए। पौधों को लगाने के तुरंत बाद पहली सिंचाई कर दें।

  • गर्मी में मौसम में पौधों को हर 3-4 दिन के अंतराल पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। वहीं ठंड के मौसम में आप 10 से 15 के अंतराल पर सिंचाई कर सकते हैं।

  • खरपतवार पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। खरपतवार होने से कीटों के प्रकोप का खतरा अधिक हो जाता है। पौधों को लगाने के 20 - 25 दिन बाद गुड़ाई कर के खरपतवार नष्ट कर देनी चाहिए।

  • रोपाई के करीब 60 दिनों बाद फसल तैयार हो जाती है। प्रति हेक्टेयर जमीन से औसतन 200 क्विंटल फसल प्राप्त कर सकते हैं।

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