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फसल बुवाई से पूर्व बीज का उपचार व इसके लाभ

फसल बुवाई से पूर्व बीज का उपचार व इसके लाभ

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 10/6/2020

उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त करने के लिए बीज का स्वस्थ होना सबसे महत्वपूर्ण है। बुवाई से पहले बीज का उपचार करना बहुत जरूरी है। इस पोस्ट के माध्यम से स्वस्थ बीज की चयन प्रक्रिया के बीज उपचार के फायदे और प्रक्रिया की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

बीज उपचार के फायदे

  • बीज के अंकुरण में वृद्धि होती है।

  • मिट्टी से होने वाले रोगों से बचाव होता है।

  • कई रोगों और कीटों के होने की संभावना कम हो जाती है।

  • स्वस्थ एवं उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त होती है।

  • फसलों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियां जैसे नमी की अधिकता या कमी में भी अच्छी पैदावार होती है।

स्वस्थ बीज के चयन की विधि

  • स्वस्थ बीज के चयन के लिए सबसे पहले करीब 10 लीटर पानी में 1 किलोग्राम नमक मिला कर घोल तैयार करना है।

  • इस घोल में लगभग 15 किलोग्राम बीज डाल कर मिलाएं।

  • ऐसा करने से स्वस्थ बीज भारी होने के कारण नीचे चले जाते हैं और अस्वस्थ बीज ऊपर तैरने लगते हैं।

  • अब अस्वस्थ बीज को निकाल कर अलग कर दें।

  • बचे हुए स्वस्थ बीज को साफ पानी से 2 से 4 बार धो कर नमक अलग कर लें।

  • बीज को धोने के बाद छाया में रख कर सूखा लें।

बीज उपचार की विधि

बीज उपचार विभिन्न प्रकार से किया जाता है। जिनमे बीज ड्रेसिंग और बीज कोटिंग सबसे ज्यादा प्रचलित है। इसके अलावा बीज पैलेटिंग भी किया जाता है।

  • बीज ड्रेसिंग : आमतौर पर सबसे ज्यादा इस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया में बीज को दवाओं के सूखे मिश्रण या घोल से उपचारित किया जाता है। बीज उपचार के लिए यह सबसे सरल प्रक्रिया है।

  • बीज कोटिंग : बीज कोटिंग में बीज पर दवाओं को चिपकाने के लिए एक विशेष बाइंडर का प्रयोग किया जाता है।

  • बीज पैलेटिंग : इस प्रक्रिया में बीज की हैंडलिंग बेहतर करने के लिए बीज के आकर में परिवर्तन किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए विशेष मशीन और तकनीकों की जरूरत होती है। बीज उपचार करने की यह सबसे महंगी प्रक्रिया है।

  • बीजामृत से उपचार : इन प्रक्रियाओं के अलावा बीज को बीजामृत से भी उपचारित किया जाता है। इस प्रक्रिया में 50 ग्राम गोबर, 50 मिलीलीटर गौ मूत्र, 50 मिलीलीटर गाय का दूध, 2 से 3 ग्राम चूना को 1 लीटर पानी में मिला कर रात भर रख दिया जाता है। अगली सुबह इस मिश्रण से बीज को उपचारित कर सकते हैं।

बीज उपचार के समय रखें इन बातों का ध्यान

  • बीज को पहले फफूंद नाशक दवा से उपचारित करें। इसके बाद कल्चर से उपचारित करें।

  • बीज उपचार करते समय फफूंद नाशक दवा और कल्चर को एक साथ न मिलाएं। ऐसा करने से कल्चर में मौजूद जीवाणु फफूंद नाशक दवा के कारण नष्ट हो जाते हैं।

  • बीज उपचारित करने के बाद जल्द से जल्द बुवाई कर देनी चाहिए।

  • उपचारित बीज को केवल बुवाई के लिए उपयोग करें।

  • स्वयं के खाने और पशुओं के आहार के तौर पर उपचारित बीज का इस्तेमाल न करें। यह हानिकारक होता है।

  • बीज उपचार में इस्तेमाल की गई दवाओं के खाली डब्बों को नष्ट कर दें।

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