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मूली की खेती कैसे करें

मूली की खेती कैसे करें

लेखक - Lohit Baisla | 21/7/2020

मूली की बुवाई के करीब 1 महीने बाद फसल तैयार हो जाती है। इसकी खेती पूरे साल की जा सकती है। यह खाद्य जड़ों वाली सब्जियों में शामिल है। इसमें विटामिन बी 6, कैल्शियम, कॉपर, मैग्नीश्यिम, पोटाश्यिम, फॉलिक एसिड आदि कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।

मिट्टी एवं जलवायु

  • भुरभुरी और रेतीली दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सबसे बेहतर है।

  • अच्छी फसल के लिए मिट्टी का पी.एच स्तर 5.5 से 6.8 होना चाहिए।

  • मूली की अच्छी पैदावार के लिए ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है।

  • इसकी खेती के लिए 10-15 डिग्री सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम है।

  • इसकी खेती गर्म तापमान में भी की जा सकती है।

बीज की सही मात्रा, बीजोपचार एवं पैदावार

  • प्रति एकड़ खेत के लिए विभिन्न किस्मों के अनुसार 2 से 4 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

  • प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम से उपचारित करना चाहिए।

  • प्रति एकड़ खेत से औसतन 80 क्विंटल मूली की उपज होती है।

खेत की तैयारी

  • मूली की जड़ें मिट्टी में गहराई तक जाती हैं। इसलिए खेत की एक बार गहरी जुताई अवश्य करें।

  • इसके बाद कल्टीवेटर या देशी हल से 3 से 4 बार हल्की जुताई करें।

  • जुताई के बाद खेत में पाटा लगाएं।

खाद एवं खरपतवार नियंत्रण

  • अच्छी पैदावार के लिए जुताई के समय प्रति एकड़ खेत में 80 से 100 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं।

  • प्रति एकड़ खेत में 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 20 किलोग्राम फॉस्फोरस और 40 किलोग्राम पोटाश मिलाएं।

  • खेत की बुवाई के समय 20 किलोग्राम तथा पौधों के बढ़ने के समय 20 किलोग्राम नाइट्रोजन का छिड़काव करें।

  • खरपतवार पर नियंत्रण के लिए 2 से 3 बार निराई - गुड़ाई करनी चाहिए।

  • बुवाई के 2-3 दिन के अंदर प्रति एकड़ जमीन में 250-300 लीटर पानी में 1 लीटर पेंडीमेथलीन मिला कर छिड़काव करने से खरपतवार से राहत मिलती है।

सिंचाई एवं कटाई

  • बुवाई के बाद पहली सिंचाई करें।

  • गर्मी के मौसम में 6-7 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए।

  • ठंड के मौसम में 10 से 12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।

  • बुवाई के 40 से 50 दिनों बाद मूली की फसल खुदाई के लिए तैयार हो जाती है।

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