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माइक्रोग्रीन की खेती बहुत कम समय में बना सकती आपको मालामाल

माइक्रोग्रीन की खेती बहुत कम समय में बना सकती आपको मालामाल

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 19/11/2021

बहुत कम समय एवं कम लागत में तैयार होने वाली माइक्रोग्रीन की खेती किसानों के लिए बहुत लाभदायक साबित हो सकती है। माइक्रोग्रीन को तैयार होने में केवल 1 सप्ताह का समय लगता है। यानी हर सप्ताह किसान इसकी खेती कर के अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। इसमें लागत तो हम आती ही है साथ ही रोगों एवं कीटों का प्रकोप भी कम होता है। आइए माइक्रोग्रीन की खेती पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

क्या है माइक्रोग्रीन?

  • बीज अंकुरित होने के बाद उनमें शुरुआत में सबसे पहले 2 पत्तियां आती हैं। इन शुरूआती पत्तियों को ही माइक्रोग्रीन कहा जाता है।

  • माइक्रोग्रीन में शुरूआती पत्तियों के साथ उसका तना भी शामिल होता है।

किन फसलों की माइक्रोग्रीन की खेती है अधिक फायदेमंद?

  • सामान्यतौर पर मूली, शलजम, चना, मटर, सरसों, मूंग, गेंहू, मक्का, मेथी, बेसिल (तुलसी), ब्रोकोली, आदि फसलों की माइक्रोग्रीन के तौर पर खेती की जा सकती है।

कैसे करें माइक्रोग्रीन की खेती?

  • इसकी खेती के लिए खेत की आवश्यकता नहीं होती है। इसकी खेती की शुरुआत घर में भी की जा सकती है। हम गमले या ट्रे में बड़े आसानी से माइक्रोग्रीन की खेती कर सकते हैं।

  • इसके लिए सबसे पहले मिट्टी या कोकोपीट के साथ आर्गेनिक खाद मिला कर गमलों या ट्रे को भरें।

  • इसके बाद बीज की रोपाई करें।

  • रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें।

  • माइक्रोग्रीन की खेती के समय इस बात का विशेष ध्यान दें कि गमले सूरज की रौशनी से दूर रहे।

  • माइक्रोग्रीन तेज धूप सहन नहीं कर सकते हैं।

माइक्रोग्रीन के स्वास्थ्य लाभ एवं इसका उपयोग

  • पौधे की शुरूआती पत्तियों यानी माइक्रोग्रीन में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसका सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक साबित होता है।

  • 5 स्टार होटल, कैफे, सुपर मार्केट, आदि स्थानों में माइक्रोग्रीन की बहुत मांग होती है। इसे सलाद के तौर पर उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही इससे विभिन्न व्यंजनों की सजावट भी की जाती है।

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