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लीची : विकार रहित, गुणवत्ता पूर्ण उत्पादन के लिए सुझाव

Author : Soumya Priyam

यदि आप व्यापारिक तौर पर लीची की खेती करना चाहते हैं तो उच्च गुणवत्ता के फलों की प्राप्ति के लिए उच्च गुणवत्ता की किस्मों का चयन करना चाहिए। विकार रहित एवं उच्च गुणवत्ता के फलों की मांग राष्ट्रीय बाजारों के साथ अन्तरराष्ट्रीय बाजार में भी होती है। विकार रहित एवं उच्च गुणवत्ता के फलों की प्राप्ति के लिए किए जाने वाले कार्यों की जानकारी यहां से प्राप्त करें।

  • विभिन्न कीट एवं रोगों के कारण फलों का आकार और स्वाद प्रभावित होता है। इसलिए कुछ समय के अंतराल पर लीची के वृक्षों का निरीक्षण करते रहें। यदि वृक्षों में कीट आक्रमण कर रहे हैं तो इन पर नियंत्रण के लिए उपयुक्त कीटनाशक का प्रयोग करें।

  • विभिन्न फल छेदक कीटों पर नियंत्रण के लिए 15 लीटर पानी में 5 मिलीलीटर देहात कटर मिला कर छिड़काव करें।

  • विभिन्न रोगों एवं कीटों से बचने के लिए बाग के अंदर साफ-सफाई रखें।

  • प्रति एकड़ खेत में 6 से 7 फेरोमोन ट्रैप लगाएं।

  • अगर वृक्षों में विभिन्न रोगों का प्रकोप हो रहा है तो इससे निजात पाने के लिए रोग से प्रभावित पत्तियों एवं टहनियों को तोड़ कर अलग करें।

  • मंजर आने से करीब 3 महीने पहले से सिंचाई का कार्य बंद कर दें। सिंचाई करने से पौधों में नई पत्तियां निकलने लगेंगी और मंजर कम निकलेंगे। फलस्वरूप उत्पादन में भी कमी आएगी।

  • यदि संभव हो तो फूल आने के समय बाग में मधुमक्खी के छत्ते रखें।

  • मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों के अनुसार मुख्य पोषक तत्व एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति करें।

  • प्रत्येक पौधे में 200 ग्राम यूरिया, 150 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 150 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश भी मिलाएं।

  • जिंक की कमी के लक्षण नजर आने पर प्रति वृक्ष 150 से 200 ग्राम जिंक सल्फेट मिलाएं।

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29 January 2021

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