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करेला की इन उन्नत किस्में की करें खेती, होगा अधिक मुनाफा

Author : Soumya Priyam

कई औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण कड़वे स्वाद के बावजूद करेले मांग में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। करेले की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए इसकी खेती करने वाले किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। अगर आप भी करना चाहते हैं करेला की खेती तो इसकी कुछ उन्नत किस्मों की जानकारी होना आवश्यक है। आइए करेले की कुछ उन्नत संकर किस्मों की पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

करेले की संकर किस्में

  • पूसा हाइब्रिड 2 : इस किस्म की खेती भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में की जा सकती है। इस किस्म के फल गहरे हरे रंग के होते हैं। फलों की लंबाई 12 से 13 सेंटीमीटर होती है। प्रत्येक पल का वजन 80 से 90 ग्राम तक होता है। प्रति एकड़ भूमि में इस किस्म की खेती करने पर 72 से 76 क्विंटल तक पैदावार होती है।

  • कोयंबटूर लौंग : इस किस्म के पौधे अधिक फैलते हैं। पौधों में फलों की संख्या भी अधिक होती है। खरीफ मौसम में खेती के लिए यह उपयुक्त किस्म है। प्रत्येक फल का वजन करीब 70 ग्राम होता है। प्रति एकड़ भूमि से 32 से 40 क्विंटल तक पैदावार होती है।

  • प्रिया : इस किस्म के करेले के फल करीब 19 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। बीज की बुवाई के 60 दिनों बाद फलों की पहली तुरई की जा सकती है। प्रत्येक बेल में करीब 35 पल आते हैं। दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में इसकी खेती वर्ष में तीन बार सफलतापूर्वक की जा सकती है। उत्तर भारतीय क्षेत्रों में अगस्त सितंबर में इसकी खेती की जाती है। प्रति एकड़ भूमि से 32 क्विंटल तक पैदावार होती है।

इन किस्मों के अलावा हमारे देश में कई अन्य किस्मों की खेती भी की जाती है। जिनमें पूसा संकर 1, अर्का हरित, कल्याणपुर बारहमासी, फैजाबादी बारहमासी, पंजाब करेला 1, हिसार सेलेक्शन, आदि कई किस्में शामिल हैं।

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29 June 2021

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