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कपास में लगने वाली फ्यूजेरियम विल्ट की समस्या और इसके नियंत्रण के उचित उपाय

कपास में लगने वाली फ्यूजेरियम विल्ट की समस्या और इसके नियंत्रण के उचित उपाय

लेखक - Dr. Pramod Murari | 4/6/2022

कपास की फसल में बुवाई से लेकर कटाई तक बहुत से रोग और कीटों का प्रभाव देखने को मिलता है। इनमें से एक है, फ्यूजेरियम विल्ट या मुरझाने की बीमारी। इस समस्या के कारण कपास के पौधे मुरझाने लगते हैं। कपास फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। समय रहते इसका समाधान करना बहुत आवश्यक है। वरना पूरी फसल खराब हो सकती है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम किसानों को फ्यूजेरियम विल्ट बीमारी के लक्षण एवं रोकथाम के उपाय बताएंगे।

कपास फसल में फ्यूजेरियम विल्ट रोग के कारण एवं लक्षण

  • फ्यूजेरियम विल्ट रोग मिट्टी और बीज में पाए जाने वाला फफूंद मैक्रोफोमिना फैजियोलिना के कारण होता है।

  • इस रोग का पहला लक्षण पौधों का मुरझाना है।

  • अधिक प्रकोप होने पर पौधे की पत्तियां पीली पड़ने लगती है एवं पौधा सूखने लगता है।

  • रोग प्रभावित पौधों की जड़ों की छाल पीली पड़ जाती है और फट जाती है।

  • कुछ समय बाद पौधे गिर जाते हैं।

  • पहले यह रोग एक पौधे में लगता है। उसके पश्चात पूरे खेत में फैल जाता है।

  • इस रोग के कारण पौधों को उचित मात्रा में पानी और पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं।

फ्यूजेरियम विल्ट रोग के रोकथाम के उपाय

  • आखिरी जुताई के समय मिट्टी में गोबर खाद और नीम खल्ली का इस्तेमाल करें।

  • जुताई के बाद खेत को अच्छी धूप लगने दें।

  • इस रोग की रोकथाम के लिए रोधक किस्मों का प्रयोग करें।

  • पानी के निकास का पूरा प्रबंध रखें।

  • दो पौधों के बीच उचित दूरी बना कर रखें।

  • संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करें।

  • प्रभावित पौधों को नष्ट कर दें।

  • फसल चक्र अपनाएं।

  • एक ही खेत में लगातार कपास की फसल ना उगाएं।

  • बीमारी की रोकथाम के लिए प्रति एकड़ खेत में 100 लीटर पानी में 1 ग्राम कोबाल्ट क्लोराइड नामक दवाई मिलाकर छिड़कें।

  • ट्राइकोडरमा विराइड फॉरमूलेशन 4 ग्राम से प्रति किलो बीज का उपचार करें।

  • इसकी रोकथाम के लिए थायोफैनेट मिथाइल 10 ग्राम और यूरिया प्रत्येक 50 ग्राम को 10 लीटर पानी में मिलाकर पौधों की जड़ों के पास डालें।

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