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कपास की खेती से जुड़ी जानकारी, समस्याएं एवं उनका निवारण

कपास की खेती से जुड़ी जानकारी, समस्याएं एवं उनका निवारण

लेखक - Soumya Priyam | 23/4/2021

कपास की बुवाई के लिए अप्रैल से मई का महीना सर्वोत्तम है। कपास के पौधों को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। वहीं अधिक सिंचाई करने से पौधों के गलने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इस समय कई किसान कपास की खेती की तैयारियों में लगे हैं। अगर आप भी करना चाहते हैं कपास की खेती तो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें। यहां से आप कपास की खेती के लिए कुछ आवश्यक जानकारियां एवं इसकी खेती में आने वाली समस्याएं एवं उनके निवारण की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आइए इस विषय पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

कपास की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी

  • कपास की खेती के लिए 6 से 8 पी.एच. स्तर की मिट्टी उपयुक्त है।

  • यदि मिट्टी का पीएच स्तर कम है तो बुवाई के 2 से 3 महीने पहले खेत में चूना मिलाएं। चूना मिलाने से मिट्टी का पी.एच. स्तर बढ़ाया जा सकता है।

  • वहीं यदि मिट्टी का पीएच स्तर अधिक है तो मिट्टी में सल्फर मिलाकर पी.एच. स्तर को कम किया जा सकता है।

बीज उपचारित करने की विधि

ज्यादातर किसान हाइब्रिड किस्मों की खेती करते हैं। हाइब्रिड किस्म की बीच पहले से उपचारित होती है, इसलिए इसे उपचारित करने की आवश्यकता नहीं होती।

देशी बीज या घर में तैयार की गई बीज की बुवाई से पहले बीज उपचारित करना आवश्यक है।

  • जैविक विधि से बीज उपचार : यदि आप जैविक विधि से बीज उपचारित करना चाहते हैं तो आप ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास से बीज उपचारित कर सकते हैं।

  • रासायनिक विधि से बीज उपचार : रासायनिक विधि से बीज उपचारित करने के लिए प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम कार्बेंडाजिम या कैप्टन से उपचारित करें।

खाद की मात्रा

  • अच्छी फसल के लिए सही मात्रा में खाद का प्रयोग करना आवश्यक है।

  • सिंचित क्षेत्रों में प्रति एकड़ खेत में 140 किलोग्राम यूरिया, 200 किलोग्राम एस.एस.पी. एवं 27 किलोग्राम एम.ओ.पी. की आवश्यकता होती है।

  • यदि आप डी.ए.पी. का प्रयोग करना चाहते हैं तो आपको प्रति एकड़ भूमि में 70 किलोग्राम डी.ए.पी., 112 किलोग्राम यूरिया, एवं 28 किलोग्राम एम.ओ.पी. की आवश्यकता होगी।

  • वहीं असिंचित क्षेत्रों में प्रति एकड़ खेत में 70 किलोग्राम यूरिया, 100 किलोग्राम एस.एस.पी. एवं 28 किलोग्राम एम.ओ.पी. की आवश्यकता होती है।

  • यदि आप डी.ए.पी. खाद का प्रयोग करना चाहते हैं तो प्रति एकड़ खेत में 35 किलोग्राम डी.ए.पी., 56 किलोग्राम यूरिया एवं 28 किलोग्राम एम.ओ.पी. की आवश्यकता होगी।

  • बुवाई से पहले यूरिया की आधी मात्रा एवं अन्य सभी खाद की पूरी मात्रा खेत में मिलाएं। बचे हुए यूरिया को 2 भागों में बांट कर खड़ी फसल में प्रयोग करें।

  • यदि आपने 2 वर्षों से खेत में जिंक का प्रयोग नहीं किया है तो अच्छी फसल के लिए आप प्रति एकड़ खेत में 10 किलोग्राम जिंक की मात्रा भी मिला सकते हैं।

रपड़ा की समस्या

  • वर्षा के बाद खेत की मिट्टी के ऊपर एक कठोर परत सी बन जाती है, इसे रपड़ा कहते हैं। यह समस्या मौसम यानी वर्षा के कारण उत्पन्न होती है।

  • बीज अंकुरित होने से पहले यानी बुवाई के 2-3 दिन बाद अगर वर्षा हुई तो मिट्टी की ऊपरी परत कठोर एवं पपड़ी की तरह हो जाती है। जिससे अंकुरित पौधे बाहर नहीं निकल पाते हैं।

  • इस समस्या से बचने के लिए बुवाई के समय का ध्यान रखें और वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले बीज की बुवाई कर लें। इसके साथ ही बुवाई के बाद सिंचाई भी न करें।

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