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कीटों से बचाव के लिए सब्जियों की खेती से पहले करें मिट्टी का उपचार

कीटों से बचाव के लिए सब्जियों की खेती से पहले करें मिट्टी का उपचार

लेखक - Dr. Pramod Murari | 12/4/2022

हमारे रोजमर्रा के आहार में सब्जियों का बहुत बड़ा योगदान होता है। जिसके लिए लोग अपने घरों के आस-पास बाग-बगीचे और यहां तक की गमलों में भी सब्जियां उगा लेते हैं। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि सब्जियों की फसल फल देने से पूर्व ही सूखने लगती है या फलों का आकार और संख्या घटने लगती है। सब्जियों की फसल में यह लक्षण अक्सर मिट्टी के अंदर रहने वाले कीट जैसे दीमक और जड़ कटुआ कीट के प्रकोप के कारण होता है। यह कीट भूमि के अंदर अंकुरित पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं और मिट्टी में सुरंग बनाकर पौधों की जड़ों को खा जाते हैं। इन कीटों पर नियंत्रण के लिए मिट्टी उपचार से संबंधित जानकारी का होना आवश्यक है। अगर आप भी सब्जियों की फसल में दीमक और जड़ कटुआ कीट के प्रकोप से परेशान हैं, तो मिट्टी के उपचार से संबंधित जानकारी यहां से देखें।

सब्जियों में दीमक और जड़ कटुआ कीट से होने वाले नुकसान

  • यह जमीन में सुरंग बनाकर पौधों की जड़ को खाकर उसे खोखला कर देते हैं।

  • फलों की गुणवत्ता पर प्रभाव डालते हैं।

  • इन कीटों के प्रकोप से पैदावार में कमी देखने को मिलती है।

  • इन कीटों के प्रकोप के कारण पौधे जमीन से पोषक तत्व नहीं ले पाते हैं।

  • पौधा सूख कर मर जाता है।

सब्जियों में दीमक और जड़ कटुआ कीट से बचाव के उपाय

  • खेती से पहले खेत में 1 बार गहरी जुताई करें और खेत को कुछ दिनों तक खुला रहने दें। इससे खेत में पहले से मौजूद कीट नष्ट हो जाएंगे।

  • खेत में कभी कच्ची गोबर का प्रयोग न करें। कच्ची गोबर में दीमक के पनपने की संभावना अधिक होती है।

  • खेत में हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का प्रयोग करें।

  • बुवाई के लिए उपचारित बीज का प्रयोग करें।

  • पौधों की रोपाई से पहले जड़ों को उपचारित करना आवश्यक है।

  • फसल काटने के बाद जड़ों को निकाल कर नष्ट कर दें।

सब्जियों में दीमक और जड़ कटुआ कीट पर नियंत्रण के तरीके

  • बीज को प्रति किलोग्राम की दर से 20 ग्राम बेसियाना फफूंदनाशक से उपचारित करें।

  • 2 किलोग्राम नीम के बीज पीसकर 1 एकड़ खेत के अनुसार प्रयोग करें।

  • 1 किलोग्राम लिंडेन पाउडर 10 लीटर पानी में घोलकर 1 एकड़ खेत में बुवाई से पहले डालें।

  • 800 मिलीलीटर क्लोरोपायरीफॉस दवा को 1.6 किलोग्राम रेत के साथ मिलाकर प्रति एकड़ बुवाई के समय डालें।

  • 1 किलोग्राम बीज को 4 मिलीमीटर क्लोरोपायरीफॉस से उपचारित करें।

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