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इस तरह करें कसूरी मेथी की खेती, होगी भरपूर पैदावार

इस तरह करें कसूरी मेथी की खेती, होगी भरपूर पैदावार

लेखक - Dr. Pramod Murari | 9/9/2021

कसूरी मेथी को विभिन्न क्षेत्रों में पान मेथी के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खेती ठंड के मौसम में की जाती है। कसूरी मेथी की हरी पत्तियों से ज्यादा इसकी सूखी पत्तियों की भी मांग होती है। बेहतरीन खुशबु के कारण मसलों में इसका विशेष स्थान है। इसके पौधों की ऊंचाई करीब 45 से 55 सेंटीमीटर तक होती है। आइए कसूरी मेथी की खेती पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

बुवाई के लिए उपयुक्त समय

  • इसकी बुवाई के लिए अक्टूबर से नवंबर तक का समय उपयुक्त है।

बीज की मात्रा

  • छिड़काव विधि से खेती करने पर प्रति एकड़ भूमि में 40 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

  • कतार में खेती करने पर प्रति एकड़ भूमि में 12 से 14 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

उपयुक्त मिट्टी एवं जलवायु

  • इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी एवं बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है।

  • इसके अलावा दोमट मटियार मिट्टी में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।

  • बेहतर पैदावार के लिए मिट्टी में प्रचुर मात्रा में कार्बनिक पदार्थ होना चाहिए।

  • इसकी खेती के लिए मध्यम आर्द्र जलवायु सर्वोत्तम है।

  • कसूरी मेथी के पौधे पाले यानी अधिक ठंड के प्रति सहनशील होते हैं।

खेत तैयार करने की विधि

  • सबसे पहले 1 बार गहरी जुताई करें। गहरी जुताई के लिए मिट्टी पलटने वाले हल का प्रयोग करें।

  • इसके बाद 2 से 3 बार हल्की जुताई कर के मिट्टी को भुरभुरी बना लें।

  • जुताई के बाद खेत में पाटा अवश्य लगाएं।

  • आखिरी जुताई के समय प्रति एकड़ खेत में 6 से 8 टन गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद मिलाएं।

  • बेहतर पैदावार के लिए कतार में बुवाई करें। सभी कतारों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखें।

  • पौधों से पौधों के बीच 5 से 8 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए।

  • बीज की बुवाई करीब 2 सेंटीमीटर की गहराई में करें।

सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण

  • बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें।

  • इसके बाद हर 10 से 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।

  • फसल की कटाई के बाद भी हल्की सिंचाई करें।

  • खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए कुछ समय के अंतराल पर निराई-गुड़ाई करें।

फसल की कटाई

  • बुवाई के करीब 1 महीने बाद फसल की पहली कटाई की जा सकती है।

  • हर 10 से 15 दिनों के अंतराल पर 4 से 6 बार तक फसल की कटाई की जा सकती है।

  • पौधों की कटाई भूमि की सतह से 3 से 4 सेंटीमीटर की ऊंचाई से करें।

  • कटाई के बाद पत्तियों की कुछ दिनों तक सूखाना चाहिए।

  • बीज प्राप्त करने के लिए 4 से 6 कटाई के बाद कटाई का कार्य बंद कर दें।

फसल की पैदावार

  • कसूरी मेथी की पैदावार कटाई की संख्या पर निर्भर करती है।

  • यदि फसल की 5 बार कटाई की गई है तो प्रति एकड़ भूमि से 36 से 44 क्विंटल हरी पत्तियां और 1.6 से 2.4 क्विंटल सूखी पत्तियां प्राप्त होती हैं।

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