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इन रोगों के कारण गन्ने की मिठास हो न जाए कम, ऐसे करें नियंत्रण

Author : Lohit Baisla

नकदी फसलों में शामिल गन्ने की खेती किसानों के लिए बहुत लाभदायक साबित होती है। गन्ना चीनी का मुख्य स्रोत है। इसकी खेती रबी मौसम के अलावा वसंत ऋतु में भी की जाती है। लेकिन कई बार कुछ रोगों के कारण गन्ने की फसल को भारी क्षति पहुंचती है। आइए इस पोस्ट के माध्यम से हम गन्ने की फसल में लगने वाले कुछ प्रमुख रोगों पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

गन्ने की फसल में लगने वाले कुछ प्रमुख रोग

  • उकठा रोग : इस रोग के होने पर गन्नों की पोरियां हल्के पीले रंग की हो जाती हैं। गन्ने का गूदा सूख जाता है और गन्ने भूरे रंग के हो जाते हैं। इस रोग से बचने के लिए प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। प्रति एकड़ भूमि में 30 किलोग्राम गोबर की खाद में 1 किलोग्राम ट्राइकोडर्मा मिला कर प्रयोग करें।

  • कंडुआ रोग : इस रोग से प्रभावित पौधों की पत्तियां पतली, नुकीली और पोरियां लंबी हो जाती हैं। इस रोग पर नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी रासायनिक उपचार नहीं है। पौधों को इस रोग से बचाने के लिए रोग रहित बीज की बुवाई करें।

  • लाल सड़न रोग : इस रोग को रेड रॉट रोग के नाम से भी जाना जाता है। लाल सड़न रोग होने पर गन्ने की पत्तियां पीली हो कर सूखने लगती हैं। गन्ने के अंदर लाल रंग के धब्बे नजर आते हैं। यह बीमारी ग्रस्त बीजों से होती है इसलिए इससे बचने के लिए बीमारी मुक्त खेतों से बीज का चयन करें। इस रोग पर नियंत्रण के लिए 0.1 प्रतिशत कार्बेन्डाजिम के घोल का छिड़काव करें।

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हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि आपको इस पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अधिक से अधिक किसान मित्र इस जानकारी का लाभ उठाते हुए गन्ने की फसल को विभिन्न रोगों से बचा सकें। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। कृषि संबंधी अधिक जानकारियों के लिए जुड़े रहें देहात से।

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24 November 2021

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