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गुड़मार : इस तरह करें खेती, होगी बेहतर पैदावार

गुड़मार : इस तरह करें खेती, होगी बेहतर पैदावार

लेखक - Lohit Baisla | 1/11/2021

गुड़मार एक औषधीय पौधा है। इसके पौधे लताओं की तरह फैलते हैं। अगस्त-सितंबर के महीने में इसके पौधों में गुच्छों की तरह फूल आते हैं। फूलों का रंग पीला होता है। इसके फल करीब 2 इंच लम्बे और कठोर होते हैं। फलों के अंदर रुई के साथ बीज होते हैं। बीज भूरे से काले रंग के एवं छोटे आकार के होते हैं। औषधीय पौधों में इसकी मांग अधिक होती है। इसकी खेती किसानों के लिए बहुत लाभदायक साबित होती है। आइए इसकी खेती पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

उपयुक्त मिट्टी एवं जलवायु

  • इसकी खेती बर्फीले क्षेत्रों को छोड़ कर लगभग सभी क्षेत्रों में सफलतापूर्वक की जा सकती है।

  • खेत में जल जमाव की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

  • पौधों के उचित विकास के लिए उष्णकटिबंधीय जलवायु की आवश्यकता होती है।

  • इसके पौधे अधिक गर्मी एवं ठंड दोनों मौसम को सहन कर सकते हैं।

  • हालांकि अधिक ठंड यानी पाला पौधों के लिए नुकसानदायक साबित होता है।

खेत तैयार करने की विधि

  • गुड़मार की बेहतर पैदावार के लिए मिट्टी का भुरभुरा होना आवश्यक है।

  • खेत तैयार करते समय सबसे पहले एक बार गहरी जुताई कर के खेत में पहले से मौजूद खरपतवार एवं अन्य फसलों के अवशेष को बाहर निकालें।

  • इसके बाद 2 से 3 बार तिरछी जुताई करें और पाटा लगाएं।

  • इसके बाद नर्सरी में तैयार किए गए पौधों की रोपाई के लिए खेत में गड्ढे तैयार करें।

  • गड्ढों के कतार में तैयार करें। सभी कतारों के बीच 1 मीटर एवं गड्ढों से गड्ढों के बीच की दूरी भी 1 मीटर रखें।

  • सभी गड्ढों में 5 किलोग्राम गोबर की खाद एवं 50 ग्राम एन.पी.के. खाद को मिला कर गड्ढों में भरें।

  • इसके बाद सभी गड्ढों में पौधों की रोपाई करें।

  • प्रति एकड़ भूमि में खेती करने के लिए करीब 400 पौधों की आवश्यकता होती है।

सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण

  • पौधों को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।

  • ठंड के मौसम में 20 से 25 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।

  • गर्मी में मौसम में 10 से 12 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए।

  • वर्षा होने पर पैधों को सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।

  • खरपतवारों पर नियंत्रण के लिए 25 से 30 दिनों बाद पहली निराई-गुड़ाई करें।

  • इसके बाद आवश्यकता के अनुसार खेत में निराई-गुड़ाई करते रहें।

तुड़ाई एवं पैदावार

  • हर वर्ष अक्टूबर से फरवरी महीने के बीच पत्तों की तुड़ाई की जा सकती है।

  • पत्तों की तुड़ाई के बाद छांव में सूखाना चाहिए।

  • इसके बाद अप्रैल-मई महीने में जड़ों की खुदाई की जाती है।

  • खुदाई के बाद जड़ों को अच्छी तरह साफ कर के छोटे-छोटे हिस्सों में बांट कर सुखाएं।

  • प्रति एकड़ भूमि से 10 से 12 क्विंटल तक पत्ते प्राप्त होते हैं।

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