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गन्ने में पोक्का बोइंग के सही लक्षणों की पहचान है जरूरी, गलत छिड़काव कर सकता है फसल को बर्बाद

Author : Surendra Kumar Chaudhari

पोक्का बोइंग गन्ने की फसल में होने वाला एक फफूंद जनित रोग है। जिसका प्रकोप सामान्य तौर पर बरसात के महीने या जून से सितम्बर तक देखा जाता है। पोक्का बोइंग फ्यूजेरियम मोनिलिफोर्मी कवक के द्वारा फैलता है और चोटी भेदक कीट के समान ही पौधे की चोटी को प्रभावित करता है। लक्षणों में होने वाली यह समानता अक्सर किसानों में रोग की गलत पहचान का कारण बन जाती है और किसान फसल में गलत कवकनाशी का उपयोग कर लेते हैं। रोग के अधिक संक्रमण के कारण गन्ने में पौधे की बढ़वार रुक जाने जैसी समस्याओं सामना करना पड़ता है, जिन्हें शुरुआती दौर में ही नियंत्रण के तरीके अपनाकर कुछ हद तक कम किया जा सकता है।

पोक्का बोइंग से फसल पर होने वाले नुकसान

  • रोग के शुरुआती दौर में ऊपर की पत्तियां तने के जुड़ाव की ओर से पीली और सफेद होने लगती हैं और कुछ दिनों बाद लाल भूरी होकर सूख जाती हैं।

  • प्रोग का अधिक प्रकोप होने के कारण पत्तियां आपस में उलझ कर घूमी हुई एवं रस्सी नुमा दिखती हैं और सड़कर गिरने लगती हैं।

  • पौधे की गोभ की पत्तियां अन्य पत्तियों से छोटी रह जाती हैं।

  • फसल में प्रकाश संश्लेषण की की क्रिया प्रभावित हो जाती है और पौधों की वृद्धि रुक जाती है।

रोकथाम के उपाय

  • खेतों में जैविक हाइड्रो कार्ड लगाएं।

  • फसल में खट्टे मट्ठे का छिड़काव भी कुछ हद तक रोग को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

  • रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर फेंक दें।

  • हेक्साकोनाजोल की 250 मिलीलीटर मात्रा को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ की दर से छिड़कें। रोग का अधिक संक्रमण होने पर 15 दिनों के अंंतराल पर दोबारा छिड़काव करें।

  • 500 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और 500 ग्राम रोको दवा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें।

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गन्ने में किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए 1800-1036-110 पर कॉल कर देहात के कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें और समय पर अपनी फसल का बचाव करें। आप अपने फोन में देहात ऐप इंसटॉल कर भी विभिन्न प्रकार के मौसमी फसल बचाव सुझाव प्राप्त कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जुड़े रहें देहात से।

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22 September 2022

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