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घर में कोकोपीट तैयार करने का आसान तरीका

घर में कोकोपीट तैयार करने का आसान तरीका

लेखक - Lohit Baisla | 24/9/2021

नारियल एक बहु उपयोगी फल है। इसके ताजे फलों के अलावा सूखे फलों को मेवे की तरह का इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर हम नारियल के फलों को निकालने के बाद उसके रेशेदार छिलकों को कचरा समझ कर फेंक देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं नारियल के रेशेदार छिलके भी फलों की तरह बहुत उपयोगी साबित होते हैं। नारियल के छिलके से घर में बागवानी करने के लिए कोकोपीट तैयार किया जा सकता है। आइए इस विषय में विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

क्या है कोकोपीट?

  • कोकोपीट को नारियल के छिलकों से तैयार किया जाता है।

  • इसे मिट्टी के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है।

  • कई बार मिट्टी की जगह गमलों में केवल कोकोपीट डालकर भी पौधे उगाए जाते हैं।

  • इन दिनों प्रो ट्री नर्सरी का चलन भी बढ़ता जा रहा है। टो ट्री नर्सरी में भी मिट्टी की जगह कोकोपीट का ही इस्तेमाल किया जाता है।

घर में कैसे तैयार करें कोकोपीट?

  • सामान्य तौर पर हम बाजार में उपलब्ध कोकोपीट का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन घर में कोकोपीट बनाना भी बहुत आसान है। हम छिलकों से प्राप्त रेशों का सीधा इस्तेमाल कर सकते हैं या हम छिलकों को डिकम्पोस्ट कर के भी कोकोपीट तैयार कर सकते हैं।

छिलकों को बिना डिकम्पोस्ट किए कैसे तैयार करें कोकोपीट?

  • इसके लिए नारियल के रेशे को निकाल कर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटें और उसे मिक्सर में पीस कर बारीक करें।

  • इसके अलावा नारियल को छीलते समय रेशों से बुरादा निकलता है। इन बुरादों को इकट्ठा करके पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

डिकम्पोस्ट विधि से कैसे तैयार करें कोकोपीट?

  • सबसे पहले नारियल के छिलकों को इकट्ठा करें।

  • किसी बड़े मिट्टी के बर्तन में पानी भर कर छिलकों को डालें। इसे 3 महीने तक डिकम्पोस्ट होने दें।

  • 3 महीने बाद इसे निकाल कर धूप में रखें।

  • इसके बाद सावधानी से छिलकों से रेशे निकालें।

  • इस तरह प्राप्त किए गए रेशे एवं बुरादे को पौधों में इस्तेमाल करें।

पौधों में कोकोपीट इस्तेमाल करने के फायदे

  • नारियल के रेशेदार छिलकों में कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं। जिनके इस्तेमाल से पौधों में पोषक तत्वों की पूर्ति होती है।

  • पौधों का विकास बेहतर तरीके से होता है।

  • कोकोपीट में बीज की बुवाई करने पर बीज जल्दी अंकुरित होते हैं एवं जड़ों का विकास भी अच्छा होता है।

  • इसमें पानी को ग्रहण करने की क्षमता अधिक होती है।

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