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गेहूं : इन अवस्थाओं पर करें सिंचाई प्रबंधन

गेहूं : इन अवस्थाओं पर करें सिंचाई प्रबंधन

लेखक - Lohit Baisla | 3/12/2020

गेहूं की पैदावार सही समय पर एवं उचित मात्रा में की जाने वाली सिंचाई पर निर्भर करती है। सिंचाई की मात्रा खेत की मिट्टी पर भी निर्भर करती है। अगर आप गेहूं की अच्छी फसल प्राप्त करना चाहते हैं तो सिंचाई प्रबंधन की जानकारी यहां से प्राप्त कर सकते हैं।

  • हल्की मिट्टी : यदि हल्की मिट्टी में गेहूं की खेती की जा रही है तो फसल को 5 से 6 सिंचाई की आवश्यकता होगी। ऐसे में आप बुवाई के 20 से 25 दिनों बाद पहली सिंचाई करें। दूसरी सिंचाई बुवाई के 40-45 दिनों बाद करें। तीसरी सिंचाई बुवाई के 60 से 65 दिनों बाद करें। चौथी सिंचाई बुवाई के 80-85 दिनों बाद करनी चाहिए। बुवाई के 100-105 दिनों बाद पांचवी सिंचाई करनी चाहिए। आखिरी सिंचाई दाने भरते समय यानी बुवाई के 115 से 120 दिनों बाद करें।

  • दोमट मिट्टी : दोमट मिट्टी में 4 सिंचाई कर के भी बेहतर फसल प्राप्त किया जा सकता है। दोमट मिट्टी में गेहूं की बुवाई के 20 से 25 दिनों बाद पहली सिंचाई करनी चाहिए। दूसरी सिंचाई कल्ले निकलते समय यानी बुवाई के 45-50 दिनों बाद करें। तीसरी सिंचाई बुवाई के 70 से 80 दिनों बाद कर सकते हैं और चौथी सिंचाई दानों में दूध भरते समय यानी बुवाई के 95 से 110 दिनों बाद करें।

  • सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं होने पर : जल की कमी वाले क्षेत्रों में केवल 2 या 3 सिंचाई करने से भी उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त हो सकती है। ऐसी स्थिति में बुवाई के 20-25 दिनों बाद पहली सिंचाई, बालियां निकलते समय दूसरी सिंचाई और बालियों में दूध बनते समय तीसरी सिंचाई करनी चाहिए।

सिंचाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • हल्की मिट्टी में करीब 6 सेंटीमीटर की गहराई तक सिंचाई करनी चाहिए। वहीं दोमट मिट्टी में करीब 8 सेंटीमीटर की गहराई तक सिंचाई करनी चाहिए।

  • खेत तैयार करते समय खेत में क्यारियां बना लें। इससे सिंचाई में आसानी होती है।

  • ऊसर मिट्टी में कम समय के अंतराल पर हल्की सिंचाई करनी चाहिए।

  • यदि सिंचाई की व्यवस्था नहीं है तो आप केवल एक बार ही सिंचाई करें। यह सिंचाई बुवाई के 20-25 दिनों बाद करनी चाहिए।

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