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गेहूं : जानें यूपी, बिहार एवं झारखण्ड में खेती के लिए उपयुक्त किस्में

Author : Soumya Priyam

गेहूं की बेहतर पैदावार के लिए किसान कई बातों को ध्यान में रखते हुए कड़ी मेहनत करते हैं। इसके बावजूद कई बार उचित पैदावार नहीं मिल पता है। इसका एक मुख्य कारण है बेहतर किस्मों का चयन। कई बार किसान अपने क्षेत्रों की अनदेखी करते हुए गेहूं की अधिक पैदावार देने वाली किस्मों का चयन करते हैं। गेहूं की किस्मों का चयन करते समय अपने क्षेत्रों को ध्यान में रखना आवश्यक है। आइए यूपी, बिहार एवं झारखण्ड में गेहूं की खेती के लिए उपयुक्त किस्मों की विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

यूपी, बिहार एवं झारखण्ड में खेती के लिए गेहूं की उपयुक्त किस्में

  • पूसा प्राची : इस किस्म को HI 1563 के नाम से भी जाना जाता है। यह किस्म उत्तर प्रदेश, बिहार एवं झारखण्ड में खेती के लिए उपयुक्त है। इस किस्म के दाने उच्च गुणवत्ता के होते हैं। यह रस्ट रोग के लिए प्रतिरोधी किस्म है। इस किस्म की गेहूं में लौह, जस्ता और तांबे जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। प्रति एकड़ भूमि से 15.2 क्विंटल तक पैदावार होती है।

  • पूसा बसंत : इस किस्म को HD 2985 के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर प्रदेश, बिहार एवं झारखण्ड में इस किस्म की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसके अलावा इस किस्म की खेती ओडिशा, सिक्किम, पश्चिम बंगाल एवं असम में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है। फसल को पक कर तैयार होने में 105 से 110 दिनों का समय लगता है। प्रति एकड़ भूमि में खेती करने पर 12 से 16 क्विंटल तक गेहूं की उपज होती है।

  • करण श्रिया : इस किस्म को जून 2021 में विकसित किया गया है। यह किस्म उत्तर प्रदेश, बिहार एवं झारखण्ड में खेती के लिए उपयुक्त है। फसल को पकने में करीब 127 दिनों का समय लगता है। इस किस्म की खेती करने पर प्रति एकड़ भूमि से 22 क्विंटल तक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं।

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19 October 2021

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