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एलोवेरा की भरपूर मांग, ऐसे खेती करके कमाएं मुनाफा

एलोवेरा की भरपूर मांग, ऐसे खेती करके कमाएं मुनाफा

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 4/6/2021

आयुर्वेद में विशेष स्थान प्राप्त घृतकुमारी को एलोवेरा भी कहते हैं। आयुर्वेदिक दवाओं एवं हर्बल सौंदर्य प्रसाधनों के निर्माण में इसका सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। इन दिनों बाजार में एलोवेरा की बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी खेती करने वाले किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। बात करें पौधों की लंबाई की तो इसके पौधे 60 से 100 सेंटीमीटर तक होते हैं। इसकी पत्तियां हरे रंग की एवं उस पर सफेद धब्बे होते हैं। आइए एलोवेरा की खेती से जुड़ी जानकारियां यहां से प्राप्त करें।

एलोवेरा की खेती के लिए उपयुक्त समय

  • एलोवेरा की खेती ठंड के मौसम के अलावा अन्य सभी मौसम में की जा सकती है।

  • इसकी खेती के लिए जुलाई-अगस्त का महीना सर्वोत्तम है।

उपयुक्त मिट्टी एवं जलवायु

  • इसकी खेती रेतीली मिट्टी, दोमट मिट्टी एवं काली मिट्टी में भी की जा सकती है।

  • गर्म आर्द्र जलवायु से लेकर शुष्क एवं उष्ण जलवायु में भी इसकी खेती की जा सकती है।

खेत तैयार करने की विधि

  1. वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले खेत में 1 से 2 बार 20 से 30 सेंटीमीटर गहरी जुताई करें।

  • इसके बाद 2 से 3 बार हल्की जुताई कर के खेत की मिट्टी को भुरभुरी एवं समतल बना लें।

  • अच्छी पैदावार के लिए प्रति एकड़ भूमि में 4 से 5 टन गोबर की खाद मिलाएं।

  • खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।

बीज का चयन एवं बुवाई की विधि

  • इसकी खेती 3 से 4 महीने पुराने एवं 4-5 पत्तों वाले कंद के द्वारा की जाती है।

  • प्रति एकड़ भूमि में 5,000 से 10,000 कंदों की आवश्यकता होती है।

  • इसकी बुवाई 1 मीटर में 2 लाइन बनाकर करें। दो लाइनों के बाद 1 मीटर की दूरी रखें।

  • वर्षा के मौसम में पुराने पौधों से कुछ छोटे पौधे निकलने लगते हैं। इन छोटे पौधों को जड़ के सहित निकालकर खेत में खाली जगहों पर रोपाई करें।

  • सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण बुवाई के तुरंत बाद एक बार हल्की सिंचाई करें।

  • इसके बाद आवश्यकता के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए।

  • सिंचाई करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि खेत में जलजमाव की स्थिति न हो।

  • खरपतवार पर नियंत्रण के लिए कुछ समय के अंतराल पर निराई-गुड़ाई करें।

फसल की कटाई

  • पौधों को लगाने के 1 वर्ष बाद इसकी कटाई की जा सकती है।

  • पौधों की निकली पत्तियों को किसी तेज धार वाले चाकू या ब्लेड से काटे।

  • तीन से चार महीने के अंतराल पर पत्तियों की कटाई की जा सकती है।

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