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एंथ्रेक्स: एक जानलेवा संक्रमण

Author : Dr. Pramod Murari

एंथ्रेक्स कुछ घातक जानलेवा संक्रामक रोगों में से एक है। विभिन्न क्षेत्रों में इसे ऊन छाटने वालों का रोग, विसहरिया, गिल्टी रोग, तिल्ली बुखार, जैसे नाम से जाना जाता है। यह रोग बेसिलस एन्थ्रासिस नामक जीवाणुओं के कारण होता है। यह रोग गाय, घोड़े, बकरियां, भेड़ जैसे पशुओं के लिए तो जानलेवा है ही, साथ ही संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने वाले इंसान भी इस रोग की चपेट में आ सकते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि एंथ्रेक्स के जीवाणु वपरित परिस्थितियों में भी कई वर्षों तक मिट्टी में मौजूद रहते हैं। बात करें मृत्यु दर की तो इस संक्रमण की मृत्यु दर करीब 20 प्रतिशत तक है।

एंथ्रेक्स रोग के लक्षण

एंथ्रेक्स रोग को इसकी तीव्रता के अनुसार चार भागों में बांटा जा सकता है। सभी भागों के लक्षण भी अलग अलग होते हैं। हालांकि कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं।

  • त्वचा पर छाले पड़ने लगते हैं।

  • पशुओं का शारीरिक तापमान बढ़ जाता है।

  • दस्त की शिकायत होती है।

  • कई बार उल्टी एवं सीने में दर्द जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं।

  • इस रोग से प्रभावित पशु अचानक बीमार हो जाते हैं।

  • कई बार पशुओं की मृत्यु भी हो जाती है।

एंथ्रेक्स रोग से बचाव के तरीके

  • पशुओं की त्वचा पर उभरने वाले छाले को नजरअंदाज न करें।

  • इस रोग के लक्षण नजर आते ही पशु चिकित्सकों से परामर्श करें।

  • रोगी पशुओं के रहने एवं खाने-पीने की व्यवस्था अलग से करें।

  • इस रोग से प्रभावित पशुओं की संपर्क में आने से बचें।

  • शोधकर्त्ताओं के द्वारा टीके का निर्माण किया गया है, जो विषाक्त पदार्थों एवं जीवाणुओं के विरुद्ध कार्य करने में सक्षम है।

  • रोगी पशुओं को पशु चिकित्सक की परामर्श के अनुसार एन्थ्रेक्स स्पोर वैक्सीन लगवाएं।

एंथ्रेक्स रोग से प्रभावित पशुओं की मृत्यु के बाद क्या करें?

  • मृत्यु के बाद पशुओं को खुले में न छोड़ें, पशुओं को मिट्टी के अंदर दबा दें।

  • पशुओं के रहने वाले स्थान को कीटाणुनाशक से साफ करें।

  • पशुओं के शव का परीक्षण न कराएं।

  • रोगी पशु की संपर्क में आने वाले चारे, बिस्तर, आदि को जला कर नष्ट कर दें।

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आने वाले पोस्ट में हम एंथ्रेक्स रोग के सभी चरण के लक्षणों पर विस्तार से जानकारी साझा करेंगे। पशुओं को होने वाले रोग एवं उनके स्वास्थ्य से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आप हमारे टोल फ्री नंबर 1800-1036-110 पर संपर्क कर के पशु चिकित्सकों से परामर्श कर सकते हैं। पशुपालन संबंधित अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें। इस जानकारी को अन्य पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

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6 December 2022

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