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दुधारू पशुओं में आफरा रोग के लक्षण एवं बचाव

दुधारू पशुओं में आफरा रोग के लक्षण एवं बचाव

लेखक - Lohit Baisla | 30/5/2021

दुधारू पशुओं में कई तरह के रोग होते हैं। जिनमे से एक है आफरा रोग। यह रोग गाय, भैंस, बकरी, भेड़, आदि पशुओं में होता है। सही साय पर उचित इलाज नहीं होने पर समस्या गंभीर रूप ले सकती है। वर्षा के मौसम में इस रोग के ओने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप भी करते हैं पशुपालन तो पशुओं को इस रोग से बचाने के लिए इस रोग का लक्षण एवं नियंतत्रण की जानकारी होना आवश्यक है। आइए आफरा रोग ले लक्षण एवं बचाव पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

क्या है आफरा रोग का कारण?

  • पशुओं के पेट में अधिक गैस बनने के कारण यह समस्या होती है।

  • आहार में अचानक बदलाव करने से भी यह समस्या होती है।

  • पशुओं के आहार में चारे भूसे के साथ कीड़े आदि खा लेने से भी आफरा रोग होने का खतरा होता है।

  • कई बार दूषित जल ग्रहण करने से भी यह समस्या होती है।

  • हरा चारा जैसे बरसीम सीधा खेत से काट कर पशुओं को खिलाना भी इस रोग के प्रमुख कारणों में से एक है।

  • अधिक मात्रा में भूसा एवं अनाज का सेवन करने से भी पशुओं में यह रोग होता है।

क्या है आफरा रोग के लक्षण?

  • गैस बाहर नहीं निकलने के कारण पशुओं का पेट फूला हुआ नजर आता है।

  • पशुओं को सांस लेने में कठिनाई होती है।

  • पशु जुगाली करना बंद कर देते हैं।

  • पशु खाना और पानी पीना बंद कर देते हैं।

  • कई बार पशु जमीन पर लेट कर पांव पटकने लगते हैं।

  • हालत गंभीर होने पर कभी-कभी पशुओं की मृत्यु भी हो जाती है।

पशुओं को आफरा रोग से कैसे बचाएं?

  • पशुओं को चारा, भूसा आदि खिलाने से पहले पानी पिलाएं।

  • पशुओं को दूषित चारा, दाना, भूसा एवं पानी न दें।

  • हरे चारे की कटाई के कुछ समय बाद ही पशुओं को चारा खिलाएं।

  • पशुओं के आहार एवं खान-पान में अचानक परिवर्तन न करें।

  • पशुओं को पोषक तत्वों से भरपूर आहार खिलाएं।

  • पशुओं के पाचन क्षमता को बढ़ाने के लिए उनके आहार में देहात खुराक एवं देहात दूध प्लस शामिल करें।

पशुओं में आफरा होने पर क्या करें?

  • बड़े पशुओं जैसे गाय, भैंस, बैल, आदि को प्रति लीटर गुनगुने पानी में 50 ग्राम एफ्रोन मिला कर नाल के दुवारा देना चाहिए।

  • पशुओं का पाचन क्रिया गड़बड़ होने पर 10 ग्राम गारलील (Garlill) नामक दवा को मुंह क द्वारा देना चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान :

  • समस्या बढ़ने पर तुरंत पशु चिकित्सक से परामर्श करें।

  • पशु चिकित्सक से परामर्श के बाद ही पशुओं को दवाएं देनी चाहिए।

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