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भिंडी की खेती करने से पहले इन बातों का रखेंगे ख्याल, तो होगी भरपूर पैदावार

भिंडी की खेती करने से पहले इन बातों का रखेंगे ख्याल, तो होगी भरपूर पैदावार

लेखक - lalan Kumar thakur | 31/3/2022

भिंडी की खेती साल में गर्मी व सर्दी के मौसम में की जाती है। भिंडी को कुछ जगह ‘ओकारा’ भी कहा जाता है। किसान के लिए सब्जी की खेती करना बहुत ही लाभप्रद होता है। भारत में भिंडी मुख्यत: उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में उगाई जाती है। भिंडी प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन से युक्त भरपूर खनिजों का भंडार होता है। तो चलिए जानते हैं कि कैसे आप भिंडी की खेती कर सकते हैं?

भिंडी की बुवाई का उपयुक्त समय

  • भिंडी की बुवाई फरवरी से शुरू हो कर मार्च के अंत तक की जाती है।

  • वहीं वर्षाकालीन भिंडी की बुवाई जून और जुलाई में की जाती है।

बीज उपचार एवं बुवाई की विधि

  • भिंडी को बोते समय कतार के बीच में कम से कम 45 सेंटीमीटर की दूरी बना कर रखें।

  • पौधों के बीच की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर रखें।

  • प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम से उपचारित करें।

  • भिंडी के बीज को सीधे खेत में ही लगाया जाता है तो बीज की गहराई 1 से 2 सेंटीमीटर रखें।

भिंडी की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी एवं खेत की तैयारी

  • भिंडी के लिए मिट्टी का पीएच मान 7.0 से 7.8 अच्छा माना जाता है।

  • भूमि की अच्छे से 2 से 3 बार जुताई करें। जिससे मिट्टी भुरभुरी और भिंडी के लिए अनुकूल हो जाएगी।

भिंडी को खाद कब और कैसे दें?

  • भिंडी की बुवाई के 15 से 20 दिन बाद जब भिंडी के पौधे पर एक दो पत्ते दिखने लग जाए तब यूरिया खाद का प्रयोग करें।

  • एक एकड़ जमीन में 15 से 20 किलोग्राम यूरिया खाद डालें।

  • इसके आलावा आप एनपीके 52, महाधन और बायोवीटा को मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे आपकी फसल का विकास अच्छे से होगा।

  • इसके अलावा आप भिंडी की फसल में जैविक खाद का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

भिंडी की फसल में रोग और कीट होने पर क्या करें?

  • भिंडी की फसल में पीला मोजेक नामक वायरस की बीमारी ज्यादातर लगती है। इस बीमारी को भिंडी की फसल का मुख्य रोग माना जाता है। इस बीमारी से भिंडी की फसल के पत्तों की शाखाएं पीली पड़ जाती है और ज्यादा प्रकोप होने पर पूरी पत्ती पीली हो जाती है। जिससे पूरी फसल नष्ट हो जाती है। यह बीमारी सफेद मक्खी के कारण गर्मी और शुष्क मौसम में ज्यादा फैलती है।

  • इस रोग को भिंडी की फसल में फैलने से रोकने के लिए आप 15 लीटर पानी में 10 ग्राम Acetamiprid 20% एसपी या फिर 25 ग्राम Diafenthiuron 50% डब्लूपी मिलाकर फसल पर छिड़काव करें, जिससे यह रोग जल्द खत्म होगा।

  • इस रोग के नियंत्रण के लिए आप 10 मिलीलीटर इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL को 15 लीटर पानी में मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं।

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