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भदावरी भैंस का करें पालन, होगा अधिक घी उत्पादन

भदावरी भैंस का करें पालन, होगा अधिक घी उत्पादन

लेखक - Dr. Pramod Murari | 16/9/2022

भारत के कई क्षेत्रों में पशु पालन आजीविका का मुख्य स्रोत है। केवल इतना ही नहीं, प्रतिदिन बढ़ता डेयरी व्यापार एवं अधिक मुनाफे के कारण किसान पशु पालन की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में गाय, भैंस, बकरी, ऊंट, मुर्गी, बतख, बटेर, आदि पशु-पक्षियों का पालन बड़े पैमाने पर किया जाता है। इनमें गाय एवं भैंस का पालन प्रमुखता से किया जाता है। इनसे प्राप्त होने वाले दूध की मांग तो हमेशा बनी रहती है। लेकिन पशु पालक एवं किसान गाय-भैंस के दूध से घी, पनीर, छेना, आदि तैयार कर के अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए अधिक दूध उत्पादन करने वाले पशुओं का चयन करना सबसे जरूरी है।

हमारे देश में भैंस की कुल 19 नस्लों को मान्यता दी गई है। इनमें से एक है भदावरी नस्ल की भैंस। मुर्रा नस्ल की भैंस की तुलना में इस नस्ल की भैंसों की दूध उत्पादन की क्षमता थोड़ी कम होती है। लेकिन भदावरी नस्ल की भैंस के दूध में वसा की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती है। आपको बता दें कि भारत सरकार के द्वारा इस नस्ल की भैंसों के संरक्षण के लिए भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान, झांसी में एक परियोजना चलाई जा रही है। इसमें कुछ भैंसों के दूध में 14 प्रतिशत तक वसा की मात्रा पाई गई है। वसा के अलावा इस नस्ल की भैस के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, मैंग्नीज, जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।

अगर पहचान की बात करें तो भदावरी भैंस का शारीरिक आकार मध्यम होता है। इनके शरीर का अगला भाग पिछले भाग से पतला होता है। इनके पैर मजबूत होते हैं और शरीर पर बाल कम होते हैं। रंग की बात करें तो यह कॉपर रंग की होती हैं और इनके पैर का निचला भाग गेहुंए रंग का होता है। आंखों के ऊपर एवं गले के निचले भाग पर सफेद रंग की धारियां बनी होती हैं। इनकी सींगे बाहर की तरफ एवं मुड़ी हुई होती हैं। पूंछ लम्बी होती हैं। इस नस्ल के व्यस्क पशुओं का औसत वजन 300 से 400 किलोग्राम तक होता है। ये भैंस इटावा, मथुरा एवं ग्वालियर क्षेत्रों में ज्यादा पाई जाती हैं।

क्या है भदावरी भैंस की विशेषतां?

  • इस नस्ल की भैंस प्रति दिन 4 से 6 किलोग्राम दूध का उत्पादन करती हैं।

  • भदावरी भैंस प्रति ब्यांत में करीब 1430 लीटर दूध का उत्पादन करती हैं। उचित देखभाल करने पर इनसे 1800 लीटर तक दूध प्राप्त किया जा सकता है।

  • ब्यांत की अवधि करीब 290 दिनों की होती है।

  • इनके दूध में 6 से 14 प्रतिशत तक वसा की मात्रा पाई जाती है।

  • दूध में वसा की मात्रा अधिक होने के कारण घी अधिक प्राप्त किया जा सकता है।

  • इस नस्ल की भैंसों का दूध A2 श्रेणी में आता है।

  • यह विपरीत परिस्थियों के प्रति सहनशील होती हैं।

  • 47 महीने की आयु में इस नस्ल की भैंस पहले बछड़े/बछिया को जन्म देने के लिए सक्षम हो जाती हैं।

  • इनके बछड़े/बछिया की मृत्यु दर कम होती है।

  • दो ब्यांत के बीच 475 दिनों का अंतर होता है।

  • शारीरिक आकार छोटा होने के कारण आहार की आवश्यकता कम होती है।

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हमें उम्मीद है इस पोस्ट में बताई गई जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। पशुओं के स्वास्थ्य एवं उन्हें होने वाले रोगों से सम्बंधित सवाल कमेंट के माध्यम से पूछ सकते हैं। पशु विशेषज्ञों से निःशुल्क परामर्श के लिए बेझिझक देहात टोल फ्री नंबर 1800-1036-110 पर संपर्क कर सकते हैं। इस जानकारी को अन्य पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को लाइक और शेयर करना न भूलें।

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