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अरबी की खेती कैसे करें

अरबी की खेती कैसे करें

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 17/7/2020

अरबी के कंद के साथ इसके पत्तों का भी उपयोग किया जाता है इसलिए इसकी खेती से किसानों को बहुत लाभ होता है। अरबी के कंद का उपयोग सब्जी , अंचार आदि के लिए किया जाता है। वहीं इसकी पत्तियों से पकौड़े और साग बनाए जाते हैं। अगर आप अरबी की खेती करना चाहते हैं तो यहां से इसकी खेती से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं।

मिट्टी एवं जलवायु

  • अरबी की बेहतर फसल के लिए गर्म एवं नम जलवायु आवश्यकता होती है।

  • इसकी खेती के लिए 21 से 27 डिग्री सेल्सियस तापमान सर्वोत्तम है।

  • अधिक गर्म एवं सूखे मौसम का पैदावार पर प्रतिकूल असर होता है।

  • इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है।

  • मिट्टी का पी.एच स्तर 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए।

रोपाई का समय एवं बीज उपचार

  • अरबी की रोपाई जून से जुलाई में की जाती है।

  • उत्तर भारत में फरवरी - मार्च महीने में इसकी रोपाई करें।

  • रोपाई से पहले प्रति किलोग्राम कंद 5 ग्राम रिडोमिल एम जेड-72 में 10 से 15 मिनट डूबा कर उपचारित करना चाहिए।

खेत की तैयारी एवं रोपाई की विधि

  • सबसे पहले खेत में मिट्टी पलटने वाली हल से एक बाद गहरी जुताई करें।

  • इसके बाद 3 से 4 बार हल्की जुताई कर खेत की मिट्टी को भुरभुरी बना लें।

  • जमीन की सतह से 10 सेंटीमीटर ऊंची क्यारियां बनाएं। सभी क्यारियों के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें।

  • क्यारियों पर 45 सेंटीमीटर की दूरी और 5 सेंटीमीटर की गहराई में कंदों की रोपाई करें।

खाद एवं उर्वरक

  • खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ खेत में 40 से 60 क्विंटल सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं।

  • प्रति एकड़ जमीन में 16 किलोग्राम नाइट्रोजन, 25 किलोग्राम फॉस्फोरस और 25 किलोग्राम पोटाश मिलाएं।

  • खड़ी फसल में 16 किलोग्राम नाइट्रोजन का छिड़काव करें।

सिंचाई एवं खरपतवार नियंत्रण

  • रोपाई के बाद 5 महीने तक हर 7 से 10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।

  • वर्षा न होने पर 15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।

  • निराई - गुड़ाई के माध्यम से खरपतवारों पर आसानी से नियंत्रण किया जा सकता है।

कटाई एवं खुदाई

  • विभिन्न किस्मों के अनुसार फसल को तैयार होने में 150 से 225 दिनों का समय लगता है।

  • कंद की रोपाई के करीब 40-50 दिन बाद पत्तियों की कटाई कर सकते हैं।

  • पत्तियां आकर में छोटी और पीली हो कर सूखने लगे तब इसकी खुदाई कर लेनी चाहिए।

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