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अदरक बिजाई का सबसे सटीक तरीका, होगी भरपूर पैदावार

अदरक बिजाई का सबसे सटीक तरीका, होगी भरपूर पैदावार

लेखक - Dr. Pramod Murari | 2/4/2021

भारत में करीब 143 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में अदरक की खेती की जाती है। इसकी अच्छी फसल के लिए कई बातों को ध्यान में रखना आवश्यक है। जिनमे खेत तैयार करने की विधि, कंद उपचारित करने की विधि, रोपाई का तरीका, खाद एवं उर्वरक की सही मात्रा, आदि शामिल हैं। आइए अदरक की अच्छी फसल के लिए पूरी जानकारी विस्तार से प्राप्त करें।

रोपाई का समय

  • उत्तर भारतीय क्षेत्रों में अप्रैल से जून महीने तक इसकी बुवाई की जाती है।

  • दक्षिण भारतीय क्षेत्रों में अदरक की बुवाई अप्रैल-मई महीने में करनी चाहिए।

  • पहाड़ी क्षेत्रों में मध्य मार्च में इसकी बुवाई करने से अच्छी पैदावार होती है।

  • सिंचाई की उचित व्यवस्था होने पर इसकी बुवाई फरवरी महीने में भी की जा सकती है।

कंद का चयन

रोपाई के लिए कंद का चयन करते समय  का रखें ध्यान :

  • रोपाई के लिए 20-25 ग्राम वजन वाले कंदों का चयन करें।

  • कंद में कम से कम 3 गांठें होनी चाहिए।

  • कंदों का आकार 2.5 सेंटीमीटर से 5 सेंटीमीटर तक होना चाहिए।

कंद उपचारित करने की विधि

  • बुवाई से पहले प्रति लीटर पानी में 3 ग्राम मैंकोजेब मिला कर बीज कंदों को उपचारित करें।

  • बीज कंदों को मैंकोजेब के घोल में 30 मिनट तक डाल कर रखें।

  • इसके बाद कंदों को 3 से 4 घंटे तक छांव वाली जगह में सूखाएं।

खेत की तैयारी एवं उर्वरक की मात्रा

  • सबसे पहले मिट्टी पलटने वाली हल से 1 बार गहरी जुताई कर के खेत को कुछ दिनों तक खुला रहने दें। इससे खेत में पहले से मौजूद खरपतवार एवं हानिकारक कीट तेज धूप से नष्ट हो जाएंगे।

  • इसके बाद देशी हल या कल्टीवेटर से 2-3 बार आड़ी-तिरछी जुताई करें।

  • जुताई के बाद खेत में पाटा लगा कर मिट्टी को भुरभुरी एवं समतल बना लें।

  • उच्च गुणवत्ता की फसल प्राप्त करने के लिए प्रति एकड़ भूमि में 8 से 10 टन कम्पोस्ट खाद, 40 किलोग्राम नाइट्रोजन, 30 किलोग्राम फास्फोरस एवं 40 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता होती है।

  • खेत तैयार करते समय 20 किलोग्राम नाइट्रोजन मिलाएं। बचे हुए 20 किलोग्राम नाइट्रोजन का खड़ी फसल में छिड़काव करें।

रोपाई की विधि

  • कंदों की बुवाई क्यारियों में करें।

  • सभी क्यारियों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखें।

  • पौधों से पौधों के बीच की दूरी भी 20 से 25 सेंटीमीटर होनी चाहिए।

  • खेत में हल्के गड्ढे तैयार करें।

  • सभी गड्ढों में कंदों को रख कर उस पर गोबर की खाद एवं मिट्टी से डालें।

सिंचाई एवं खुदाई

  • बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई करें।

  • अच्छी फसल के लिए मिट्टी में नमी की कमी न होने दें।

  • टपक सिंचाई विधि से फसल की सिंचाई करने से बेहतर फसल प्राप्त किए जा सकते हैं।

  • अदरक की फसल को तैयार होने में करीब 8 महीने का समय लगता है।

  • जब पौधों की पत्तियां पीली हो कर सूखने लगे तब इसकी खुदाई कर लेनी चाहिए।

  • खुदाई के बाद प्रकंदों को अच्छी तरह साफ कर के 1 दिन धूप में सुखाएं।

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