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मूंग : जानें उपयुक्त मिट्टी, बीज एवं उर्वरक की मात्रा

Author : Dr. Pramod Murari

मूंग प्रमुख दलहनी फसलों में एक है। रबी की फसल कटाई के बाद इसकी बुवाई का सबसे उपयुक्त है। अक्सर किसान गेहूं, चना, सरसों, आलू, मटर, अलसी, जौ आदि की कटाई के बाद अपनी खेत को खाली रहने देते हैं। ऐसे में अधिक मुनाफे के लिए करें मूंग की खेती। मूंग के पौधों की जड़ों में स्थित ग्रंथियों में वातावरण से नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थापित करने वाले सूक्ष्म जीवाणु पाए जाते हैं। इससे खेत की मिट्टी की उर्वरक क्षमता में भी बढ़ोतरी होती है। जिसका सीधा असर मूंग की कटाई के बाद लगाई जाने वाली फसलों को होता है। इसकी खेती से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां यहां से प्राप्त करें।

उपयुक्त मिट्टी

  • दोमट एवं मटियार दोमट मिट्टी इसकी खेती के लिए सर्वोत्तम है।

  • बलुई दोमट मिट्टी में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है।

  • मिट्टी की जलधारण क्षमता अच्छी होनी चाहिए।

बीज की मात्रा एवं बीज उपचारित करने की विधि

  • गर्मी के मौसम में खेती करने पर प्रति एकड़ खेत में 10 से 12 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है।

  • प्रति किलोग्राम बीज को 2 ग्राम कार्बेन्डाज़िम से उपचारित करें।

  • इसके अलावा प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम थीरम से भी उपचारित कर सकते हैं।

  • इसके बाद बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करें।

  • राइजोबियम कल्चर से उपचारित बीज को छांव में रखें। धूप में कल्चर में मौजूद जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

खाद एवं उर्वरक की मात्रा

  • प्रति एकड़ भूमि में 6 से 8 किलोग्राम नाइट्रोजन एवं 16 किलोग्राम फॉस्फोरस की आवश्यकता होती है।

फलियों की तुड़ाई

  • फलियों के पकने के बाद तुड़ाई करें।

  • कटाई में अधिक देर न करें। अधिक देर होने पर फलियां चटकने लगती हैं।

  • फलियों की तुड़ाई के बाद पौधों को जुताई कर के खेत में मिला दें। इससे खेत की उर्वरक क्षमता में वृद्धि होती है।

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हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि आपको यह जानकारी पसंद आई है तो इस पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अन्य किसान मित्र भी अपनी खाली खेत में मूंग की खेती कर के अधिक मुनाफा कमा सकें। इससे जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछें।

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12 March 2021

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