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अंगूर की बेहतर पैदावार के लिए उर्वरक प्रबंधन

अंगूर की बेहतर पैदावार के लिए उर्वरक प्रबंधन

लेखक - Surendra Kumar Chaudhari | 8/1/2022

मीठे रसीले अंगूर तो हम सभी के पसंदीदा फलों में शामिल है। यह एक बहुवर्षीय फसल है। एक बार पौधों को लगाने के बाद कई वर्षों तक फल प्राप्त किया जा सकता है। इसकी बेहतर पैदावार के लिए एवं उच्च गुणवत्ता के फल प्राप्त करने के लिए सही समय पर पोषक तत्वों की पूर्ति करना आवश्यक है। आइए अंगूर की फसल में उर्वरक प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी प्राप्त करें।

नए पौधों की रोपाई के समय

  • पौधों की रोपाई के समय बाग में 50 सेंटीमीटर लम्बाई, 50 सेंटीमीटर चौड़ाई एवं 50 सेंटीमीटर गहराई वाले गड्ढे तैयार करें।

  • इसके बाद प्रत्येक गड्ढे में 15 किलोग्राम गोबर की खाद, 250 ग्राम नीम की खली, 200 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 100 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश मिला कर भरें।

2 वर्ष की आयु के पौधों में

  • प्रत्येक बेल में 30 किलोग्राम गोबर की खाद के साथ 300 ग्राम नाइट्रोजन, 250 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 300 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश की आवश्यकता होती है।

3 वर्ष की आयु के पौधों में

  • प्रत्येक बेल में 45 किलोग्राम गोबर की खाद के साथ 400 ग्राम नाइट्रोजन, 375 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 450 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश का प्रयोग करें।

4 वर्ष की आयु के पौधों में

  • प्रत्येक बेल में 60 किलोग्राम गोबर की खाद के साथ 500 ग्राम नाइट्रोजन, 500 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 650 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश की आवश्यकता होती है।

5 वर्ष या इससे अधिक आयु के पौधों में

  • प्रत्येक बेल में 600 ग्राम नाइट्रोजन, 650 ग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट एवं 750 ग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश की आवश्यकता होती है।

  • इसके साथ ही 60 से 70 किलोग्राम गोबर की खाद का भी प्रयोग करें।

उर्वरक प्रयोग करते समय रखें इन बातों का ध्यान

  • पौधों की छंटाई के बाद यानी जनवरी महीने के अंतिम सप्ताह में नाइट्रोजन की आधी मात्रा के साथ म्यूरेट ऑफ पोटाश एवं पोटेशियम सल्फेट की पूरी मात्रा का प्रयोग करें।

  • बेलों में फल आने के बाद बचे हुए नाइट्रोजन का प्रयोग करें।

  • उर्वरकों को मुख्य तने से 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर डालें।

  • उर्वरकों के प्रयोग के बाद सिंचाई करें।

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