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Ranjan Thakur

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2 August 2021
सोयाबीन की फसल छोड़कर धान की खेती करने लगे हैं इस राज्य के किसान, जानें वजह इस साल मध्य प्रदेश में सोयाबीन की बुवाई का रकबा 23 जुलाई को 44.7 लाख हेक्टेयर था, जो एक साल पहले के स्तर से 19% कम था, जबकि इसी अवधि में धान का रकबा 44% बढ़कर 16.8 लाख हेक्टेयर था. सोयाबीन की रिकॉर्ड तोड़ महंगा के बावजूद मध्यप्रदेश के किसानों का सोयाबीन खेती से अब मोहभंग हो रहा है. मध्य प्रदेश में भारी बारिश के कारण लगातार दो वर्षों की फसल के नुकसान कारण कई सोयाबीन किसान अब इसकी खेती छोड़कर खरीफे के सीजन में धान की खेती की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं. जिसके परिणामस्वरूप लगातार तीसरी बार तिलहन की फसल का उत्पादन सामान्य से कम हो सकता है. गौरतलब है कि सोयाबीन खरीफ सीजन की सबसे बड़ी तिलहन फसल है. मध्यप्रदेश में घटा सोयाबीन उत्पादन 2018-19 तक मध्य प्रदेश सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक था. इस वक्त मध्य प्रदेश में सोयाबीन का उत्पादन 67 लाख टन के करीब था. हालांकि, उत्पादन 2019-20 में घटकर 49 लाख टन हो गया और अगले वर्ष मामूली रूप से लगभग 51 लाख टन हो गया . 65 लाख टन के सामान्य उत्पादन से काफी कम. 2020-21 में लगभग 62 लाख टन के साथ महाराष्ट्र सबसे बड़े उत्पादक के रूप में उभरा. उड़द की खेती कर रहे किसान फाइनांशियल एक्सप्रेस के मुताबिक मध्य प्रदेश में फसल सलाहकार सेवाओं में लगी एक कंपनी के कार्यकारी अधिकारी संजीव प्रजापति ने कहा कई किसान धान के बीज मांग रहे हैं क्योंकि वे पिछले दो वर्षों के दौरान नुकसान झेलने के बाद सोयाबीन से शिफ्ट होना चाहते हैं. इसके अलावा, पिछले कुछ दिनों में कम बारिश के कारण, कुछ किसान, विशेष रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में, उड़द को एक विकल्प के रूप में चुन रहे हैं. उन्होंने कहा कि उच्च दर और बीजों की अनुपलब्धता के कारण भी सोयाबीन किसान अब इसकी खेती से हटकर धान की खेती की तरफ बढ़ रहे हैं. घटा सोयाबीन के बुवाई का क्षेत्र इस साल मध्य प्रदेश में सोयाबीन की बुवाई का रकबा 23 जुलाई को 44.7 लाख हेक्टेयर था, जो एक साल पहले के स्तर से 19% कम था, जबकि इसी अवधि में धान का रकबा 44% बढ़कर 16.8 लाख हेक्टेयर था. उड़द का रकबा 30% से अधिक घटकर 9.37 लाख हेक्टेयर रह गया है. राज्य में सामान्य से अधिक होगा बारिश मध्य प्रदेश में 1 जून से अब तक सामान्य से 2% अधिक बारिश हुई है, जिसका मुख्य कारण जून-सितंबर मानसून सीजन के पहले महीने में औसत से 36 फीसदी अधिक बारिश हुई थी. मौसम का सबसे गर्म महीना जुलाई में बारिश राज्य में सामान्य से 11-12 फीसदी कम रहने की संभावना है. मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में कई जगहों पर सोयाबीन की कीमतें रिकॉर्ड 10,000 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गई हैं. जबकि अक्टूबर-दिसंबर 2020 की प्रमुख कटाई अवधि के दौरान सोयाबीन के दाम, 3,904 रुपये प्रति क्विंटल थे. जो भारतीय न्यूनतम मूल्य के औसत के खिलाफ है. सोयाबीन का अखिल भारतीय औसत एमएसपी 3,880 रुपये है. वहीं किसानों को धान की खेती की तरफ शिफ्ट होने पर एक विशेषज्ञ ने कहा कि राज्य सरकार और सोयाबीन प्रोसेसर को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि किसी के नियंत्रण से परे प्राकृतिक आपदाओं के मामले में फसल बीमा या मुआवजे के माध्यम से किसानों को जोखिम कम से कम किया जाए. अन्यथा, किसान किसी अन्य फसल की ओर रुख करेंगे, जिससे सुनिश्चित रिटर्न मिलेगा. मध्य प्रदेश ने अभी तक इस खरीफ सीजन के लिए प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना शुरू करने पर निर्णय नहीं लिया है. जानकारी कैसी लगी कृपया कमेंट करके जरूर बताये!!
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