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Kishor Jha

Kishor Jha

3 July 2021
कपास बोवाई की संपूर्ण जानकारी:_ भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादन करने वाला देश है। लम्बे रेशे वाली कपास की किस्मे सबसे बेहतर होती हैं, जिनकी लम्बाई करीब 5 सेंटीमीटर होती है। वहीं 3.5 से 5 सेंटीमीटर लम्बे रेशे वाली किस्मों को मिश्रित कपास एवं 3.5 सेंटीमीटर मालनी रेशों वाली किस्मों को छोटी किस्मों में शामिल किया जाता है। नकदी फसल होने के कारण कपास को सफेद सोना भी कहा जाता है। आइए इसकी खेती से पहले बुआई से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त करें। कपास की खेती बीज के द्वारा की जाती है। बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज को 2.5 ग्राम कार्बेंडाजिम या कैप्टन से उपचारित करें। जैविक विधि से बीज उपचारित करने के लिए ट्राइकोडर्मा या स्यूडोमोनास का प्रयोग करें। मुख्य खेत में पौधों की रोपाई से पहले इसकी नर्सरी तैयार की जाती है। वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले बीज की बुवाई कर लेनी चाहिए। बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई करने से बचें। अगर आप बी टी कपास की की खेती कर रहे हैं तो क्यारियों के बीच 108 सेंटीमीटर की दूरी रखें एवं पौधों से पौधों के बीच 60 सेंटीमीटर की दूरी रखें। अमेरिकन किस्मों की कपास की खेती करने पर क्यारियों से क्यारियों के बीच की दूरी 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखें। देशी किस्मों की खेती करने पर क्यारियों से क्यारियों के बीच 45 सेंटीमीटर दूरी और पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर होनी चाहिए। बुवाई के 5 से 6 दिनों बाद सिंचाई अवश्य करें। बीज अंकुरित होने के करीब 20 से 30 दिनों बाद सिंचाई करें। यदि सूखे क्षेत्रों में कपास की खेती की जा रही तो बुवाई के बाद 5 दिन तक प्रति दिन 2 घंटे ड्रिप विधि से सिंचाई करें। हमें उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। यदि आपको इस पोस्ट में दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे पोस्ट को लाइक करें एवं इसे अन्य किसानों के साथ साझा भी करें। जिससे अन्य किसान मित्र भी इन जानकारियों का लाभ उठाते हुए कपास की अच्छी फसल प्राप्त कर सकें। कपास की खेती से जुड़े अपने सवाल हमसे कमेंट के माध्यम से पूछे।
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