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Abhishek Kumar

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1 August 2021
किसानों के लिए बड़ी खबर- इन फसलों की खेती के लिए अगस्त से जरूरी हैं ये कदम उठाना…वरना हो सकता है नुकसान फसल की निचली पत्तियों पर भूरे-लाल कत्थई रंग के बन रहे हों धब्बे तो समझिए आपके खेत में है जिंक की कमी. धान की खेती में इन बातों का भी रखें ध्यान. प्रमुख खरीफ फसलों (Kharif crops) की बुवाई का काम लगभग खत्म हो चुका है. अगस्त (August) आने वाला है. फसलों की देखरेख के लिए यह महीना किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अगस्त में कृषि संबंधी आवश्यक कार्यों को लेकर कुछ सलाह दी है. विशेषतौर पर धान और मक्का के लिए. ताकि अच्छी उपज हो और किसानों की इनकम बढ़े. धान की फसल में इस बात का रखें ध्यान कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक धान (Paddy) की रोपाई वाली फसल में सिंचाई (Irrigation) की अच्छी व्यवस्था जरूरी है. धान की 4 अवस्थाओं- रोपाई, ब्यांत, बाली निकलते समय तथा दाने भरते समय खेत में 5-6 सेंटीमीटर पानी अवश्य भरा रहना चाहिए. यदि मिट्टी में जिंक तत्व की कमी है तो फसल पर निचली पत्तियों पर भूरे-लाल कत्थई रंग के धब्बे बन जाते हैं. इसके लिए 15-20 दिन के अंतराल पर 3 छिड़काव 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट 0.25 प्रतिशत बुझे हुए चूने के घोल के साथ करने चाहिए. रोपाई के 30 दिन बाद ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम का इस्तेमाल करें. धान की पत्ती पर झुलसा रोग फैलने से रोकने के लिए खेत से समुचित जल निकास की व्यवस्था की जाए तो बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. बीमारी के नियंत्रण के लिए 74 ग्राम एग्रीमाइसिन-100 और 500 ग्राम कॉपरऑक्सीक्लोराइड को 500 लीटर पानी में घोल बना कर प्रति हैक्टेयर की दर से 3-4 बार छिड़काव करें. ज्वार , बाजरा और मक्का नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा बुवाई के 30-35 दिन बाद खड़ी फसल में छिड़क दें. असिंचित दशा में 2 प्रतिशत यूरिया (Urea) का 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर खड़ी फसल में छिड़काव करना काफी लाभप्रद रहता है. अच्छी उपज लेने के लिए निराई-गुडाई करना जरूरी है. तना छेदक की रोकथाम के लिए बुवाई के 25 दिनों बाद कार्बोफ्यूरान (3जी ) दानेदार कीटनाशक 7.5 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर की दर से डालना चाहिए. दस दिनों के बाद दूसरी बार भी इसी मात्रा में पौधों की गोफ में डालना चाहिए दलहनी फसलें आईसीएआर के वैज्ञानिकों के मुताबिक खरीफ की दलहनी फसलों में आवश्यकता के मुताबिक उपयुक्त विधि से जल निकास आवश्यक होता है. अरहर में बुवाई के 45-50 दिन तक खरपतवारों की रोकथाम करना आवश्यक होता है. हेलिकोवा की सूडी की निगरानी के लिए 5 फेरोमोन ट्रैप प्रति हैक्टर लगाएं तथा आवश्यकतानुसार बीटी और एचएनपीवी का छिड़काव करें. कीटनाशक डेल्टामेथिन (1 मिली लीटर) का छिड़काव कीटों की संख्या को ध्यान में रखकर करें. मूंग और उड़द में चित्तीरोग दिखाई देने पर 0.05 प्रतिशत बाविस्टीन या 0.2 प्रतिशत जिनेब का छिड़काव करना चाहिए. जानकारी अच्छी लगी हो तो पोस्ट लाइक और शेयर अवश्य करें!!
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