Beej se bajar tak
 खोजें
Rohit Gujar

Rohit Gujar

9 January 2021
जुकिनी: इस विदेशी सब्जी के खेती से होती है प्रति एकड़ 300000 की आमदनी! ---------------------++++++++------------------ खीरा की तरह दिखने वाली ये खूबसूरत सब्जी कद्दू और लौकी की तरह पाचन में हल्की और सेहत के लिहाज से बेहद फायदेमंद है। एक बार आप इसके फायदे जान लेंगे, तो नियमित करेंगे इसका इस्तेमाल। जहां पहले इसकी खेती केवल विदेशों में ही होती थी, वहीं अब भारत में भी किसान इसकी बुवाई करने लगे हैं. इसके पौधे झाड़ियों की तरह दिखते हैं. साथ ही डेढ़ से 3 फीट तक इनकी लम्बाई होती है. ये गोलनुमा भी हो सकती हैं. यह हरे या पीले रंग की होती है. जुकिनी एक ऐसी सब्जी है जो खाने में स्वादिष्ट तो होती ही है साथ ही ये पौष्टिक भी होती है. इसमें पानी की मात्रा बहुत होती है इसलिए इसे गर्मियों में खाना फायदेमंद होता है. .- जुकिनी में पानी की मात्रा बहुत होती है इसलिए यह वजन कम करने में मददगार है. - यह ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करती है. - अस्थमा के रोगियों के लिए जुकिनी खाना फायदेमंद रहता है. - आंखों के लिए भी यह बहुत अच्छी रहती है. - चेहरे पे उम्र के बढ़ने के असर को भी कम करती है जुकिनी. - जुकिनी दिल को मजबूत बनाती है. - इसके सेवन से कोलेस्ट्रोल लेवल भी नियंत्रण में रहता है.- जुकिनी पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है.- यह थाइरॉयड को भी नियंत्रित रखती है. ज़ुकिनी की उन्नत किस्में ऑस्ट्रेलियन ग्रीन 4-5, पूसा पसंद, अर्ली यलो प्रोलीफिक, पैटीपैन. ज़ुकिनी की खेती के लिए जलवायु और भूमि इसकी खेती के लिए गर्म जलवायु उचित है क्योंकि यह ज्यादा ठंड और पाला सहन नहीं कर सकती. ज़ुकिनी की खेती के लिए अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 20 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए, लगभग 30 डिग्री सेल्सियस तापमान उचित है. फसल के लिए बलुई दोमट भूमि जिसमें जल निकास का उत्तम प्रबंध हो, उपयुक्त मानी गई है. ज़ुकिनी फसल के लिए खेत की तैयारी किसानों को इसके लिए खेत की 3 से 4 जुताई करनी चाहिए. साथ ही, बीज की बुवाई के लिए नाली के साथ थालों की भी व्यवस्था हो. आप सहफसली खेती (inter-cropping) के तौर पर दूसरी फसलों के साथ मेड़ों पर भी इसकी बुवाई कर सकते हैं. बीज की मात्रा और बुवाई ज़ुकिनी की खेती के लिए किसान एक हेक्टेयर खेत के लिए 7 से 8 किलोग्राम बीज ले सकते हैं. अंकुरित करके बीजों को खेत में 1 से 1.5 मीटर की दूरी पर 30 से 40 सेंटीमीटर चौड़ी नालियों के दोनों किनारों यानी मेड़ों पर 60 से 75 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं. ज़ुकिनी की खेती में खाद एवं उर्वरक फसल के बेहतर उत्पादन के लिए किसान कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी खाद 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर की दर से इस्तेमाल करें. बीज बुवाई के 2 से 3 हफ्ते पहले मिट्टी में अच्छी तरह खाद मिला दें. साथ ही, 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस और पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से लें. फास्फोरस और पोटाश के साथ एक तिहाई नाइट्रोजन नालियों में डाल कर मिट्टी में मिला दें. बाकी नाइट्रोजन दो बराबर भागों में करके बुवाई के एक महीने बाद नालियों में इस्तेमाल करें और गुड़ाई कर मिट्टी चढ़ाएं. पौधों के विकास के दौरान भी इसका इस्तेमाल करें. ज़ुकिनी की सिंचाई ग्रीष्मकालीन फसल होने की वजह से इसकी 7 दिन यानी लगभग हफ्ते भर के अन्तर पर सिंचाई करते रहें. फलों की तुड़ाई जब ज़ुकिनी पूर्ण रूप से विकसित हो जाए, तभी मुलायम रहते ही उसकी तुड़ाई कर लें जिससे बाजार में उसकी गुणवत्ता की अच्छी कीमत मिल सके. जुकिनी की खेती में प्रति एकड़ में तिन लाख की आमदनी प्राप्त होती हैं।
like10लाइक
2कमेंट

कृषि विशेषज्ञ से मुफ़्त सलाह के लिए हमें कॉल करें

farmer-advisory

COPYRIGHT © DeHaat 2022

Privacy Policy

Terms & Condition

Contact Us

Know Your Soil

Soil Testing & Health Card

Health & Growth

Yield Forecast

Farm Intelligence

AI, ML & Analytics

Solution For Farmers

Agri solutions

Agri Input

Seed, Nutrition, Protection

Advisory

Helpline and Support

Agri Financing

Credit & Insurance

Solution For Micro-Entrepreneur

Agri solutions

Agri Output

Harvest & Market Access

Solution For Institutional-Buyers

Agri solutions

Be Social With Us:
LinkedIn
Twitter
Facebook